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Author: Rajni Chhabra

Rajni Chhabra
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कवियत्री व् अंकशास्त्री /हिंदी, इंग्लिश , पंजाबी में कविता लेखन व उर्दू, राजस्थानीं, पंजाबी से हिंदी , इंग्लिश में अनुवाद कार्य, रचनाएं व इंटरव्यू दैनिक भास्कर, राजस्थान डायरी,अमर उजाला, अनुवाद परिषद्, देहली, इंडियन लिटरेचर, साहित्य अकेडमी द्वारा प्रकाशित /होने से न होने तक, पिघलते हिमखंड, Maiden Step, Mortgaged मेरे काव्य संग्रह

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तुम्हारी वसीयत

सहेज कर रखूँगी वतन की आन की ख़ातिर जो शौर्य की वसीयत तुम [...]

मैं कहाँ थी

मैं जब वहां थी तब भी, मैं नहीं वहां थी अपनों की दुनिया के [...]

सिमटते पँख

पर्वत, सागर, अट्टालिकाएं अनदेखी कर सब बाधाएं उन्मुक्त उड़ने [...]

मन विहग

आकुल निगाहें बेकल राहें विलुप्त होता अनुपथ क्षितिज छूने [...]