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Author: Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal
Posts 38
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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“ईर्ष्या” (मनोद्गगार)

"ईर्ष्या" आज शून्य को तकती प्यासी नज़रें कुछ तलाश रही [...]

बेटी

हाइकु में कविता "बेटी" माँ का सपना,बाबुल के अँगना,जन्मी ये [...]

“ख्वाहिश”

"ख़्वाहिश" तुम से ख़्वाहिश मेरी हमनशीं जानलो अपनी धड़कन में [...]

“बेरुखी”

"बेरुखी" रदीफ़--बैठे हैं काफ़िया-आके दिखाते बेरुखी चिलमन [...]

“मनभावन” श्रृंगार रस प्रधान कह मुकरी छंद/पहेलियाँ

विधा- कविता/पहेली "मनभावन" श्रृंगाररस प्रधान (कह मुकरी [...]

“मनभावन पहेली”

"मनभावन (कह मुकरी छंद) रूप सलौना खूब सजाते श्याम भ्रमर मन को [...]

“मनभावन”

"मनभावन (मुकरी छंद) रूप सलौना खूब सजाते श्याम भ्रमर मन को अति [...]

“बेवफ़ाई”

"बेवफ़ाई" मुहब्बत में नज़र फ़िसली, दिले नादान ना माना। बसाया [...]

“प्यासे अधर”

"प्यासे अधर" सदियों से प्यासे अधरों पर मधु मुस्कान कहाँ से [...]

“हँसीन लम्हों की यादें और ये ख़त”

"हंसीन लम्हों की यादें और ये ख़त" ख़त का ज़िक्र चलते ही पिया [...]

मैं और मेरी माँ

🌷मैं और मेरी माँ🌷 बारिश की बूदों में माँ तू, मेघ सरस बन जाती [...]

“ज़िंदगी ज़ख्म की कहानी है”

"ज़िंदगी ज़ख़्म की कहानी है" बह्र-२१२२ १२१२ [...]

“ज़िंदगी ज़ख़्म की कहानी है”

"ज़िंदगी ज़ख़्म की कहानी है" बह्र-२१२२ १२१२ [...]

“कहाँ इंकार करता हूँ”

"कहाँ इंकार करता हूँ" बहर- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ रदीफ़ करता [...]

“किसकी पराजय?”

"किसकी पराजय?" चली उम्मीद की आँधी जना जब पुत्र माता ने बजी [...]

“दरिंदगी के बढ़ते कदम और हम”

"दरिंदगी के बढ़ते कदम और हम" [...]

“मधुशाला”

"मधुशाला"(माहिया छंद, विधा-२२२२२२ २२२२२ २२२२२२,पहली तीसरी [...]

“परिंदे”

"परिंदे" आँखों में परिंदे पाले थे उम्मीद लगा इंसानों [...]

हे केशव नव अवतार धरो

"हे केशव नव अवतार धरो" घात लगाए बैठे दानव मानवता क्यों भूल [...]

़आग दरिया में भी लगा देना

ग़ज़ल बहर २१२२ १२१२ २२ काफ़िया- आ रदीफ़- देना ख्वाब आए नहीं [...]

दामन क्यों महकता है??

बरसते हुस्न से पूछो दिवाना क्यों मचलता है। छलकते जाम से पूछो [...]

“प्रकृति बचाओ”

रक्त अश्रु बहा प्रकृति करे ये रुदन नहीं ध्वस्त करो मेरा कोमल [...]

“पुस्तक”

पुस्तक सच्चा मित्र अमिट ज्ञान भंडार विशाल [...]

“ख़्वाहिश”

कतरा-कतरा पिघल रही हैं आहें तेरी यादों की , जी चाहे साँसों [...]

“होली” सायली छंद

सायली छंद (१, २, ३, २ ,१ ) *होली* उमंग रंग -बिरंगी तन-मन छाई प्यारी [...]

होली के दोहे

होली पर दोहे [...]

“चली बयार फाग की देखो”

🌷चली बयार फाग की देखो🌷 [...]

“होली के रंग”

"होली के रंग" सोच रही हूँ कलम हाथ ले रँग दूँ सबको होली में, फाग [...]

“नारी की महत्ता”दोहे

"*नारी की महत्ता पर दोहे* [...]

“अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और भारतीय महिलाएँ”

"अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और भारतीय महिला" [...]