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Author: राजेश"ललित" शर्मा

राजेश
Posts 52
Total Views 531
मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता। लेखन :- राजेश"ललित"शर्मा रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित "लाशों के ढेर पर"।"माटी की महक" काव्य संग्रह में प्रकाशित।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“मजमा”

चुनाव नज़दीक आते ही नेता "मजमा" लगाना शुरु कर देते हैं। [...]

लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ

दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद [...]

लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ

दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद [...]

बरस पड़ी आँखें

"बरस पड़ी आँखें" "क्षणिका" ------------------- कल बादल भी नहीं थे तन्हा [...]

“मन की खिड़की”

यह कोई कविता नहीं;मन से निकली आनायास एक आवाज़ है जो मन से [...]

सारोकार:-“शिक्षक दिवस”—प्राचीन शिक्षा

सारोकार:---------"शिक्षक दिवस" ------------------------- "प्राचीन शिक्षा [...]

दो रचनायें प्रकाशनार्थ

दो रचनायें पाठकों के सम्मुख हैं।प्रतिक्रिया [...]

सारोकार:- “पत्रकारिता–गिरता स्तर”

"पत्रकारिता--गिरता स्तर" -------------------- पत्रकारिता की शुरुआत भारत [...]

अपने अपने कृष्ण

जब भी हम संकट में होते हैं तो हम माँ और भगवान को याद करते [...]

मुस्कुराती रहो मोनालिसा

तेज़ी से बदलती हुई दुनिया में घटनाओं के प्रति हम उदासीन होते [...]

मरती धरती

वैज्ञानिकों के बार बार चेतावनी देने के पश्चात् भी पर्यावरण [...]

मन खट्टा

"मन खट्टा" ----------------- मन खट्टा हो गया चल यार कैसी बात करता है मन [...]

अकेलापन भी साथी

अकेलापन भी साथी ----------------------- आज अकेलेपन को ही बना लेते हैं [...]

इंतज़ार मत करना

"इंतज़ार मत करना" ------------------------- इंतज़ार मत करना अब मेरा थक गये [...]

“दम लगा के हई शा”

"दम लगा के हई शा" -------------------- दम लगा के हईशा हिम्मत न हार थक मत अब [...]

“जले हाथ”

"जले हाथ" --------------- डालोगे ग़र हाथ पराई आग में हाथ फिर अपने ही [...]

उलझे धागे

"उलझे धागे"मन की उलझन को धागों की उधेड़बुन की तरह सुलझाने का [...]

थका थका दिन

अकेलेपन से व्यथित मन कोई साथी ढूँढ रहा है।पर जब उसे अपने आप [...]

क्षणिका

"क्षणिका" ------------------- पहले भी अजमाया था अब भी अाज़मा ले वैसे का [...]

प्रयोग करो:फेंक दो

कभी कभी यूँ लगता है कि कुछ लोग आप के साथ आप को निजी स्वार्थ के [...]

“बहेलिया”

अभी उतर प्रदेश में एक बेटी के साथ छेड़खानी की घटना में जो कुछ [...]

“मन का चोर”

"मन का चोर" दो भागों में रची कविता है जिसमें एक बाहरी चोर और [...]

“सच की गुंजाईश “

आजकल सच को भी अपनी "सत्यता" की गवाही तलाशनी पड़ती है।सत्य के [...]

ग़ज़ल

"ग ज़ ल" ------------------------- घाव पर चोट बनाये रखिये; बेअसर न हो,दर्द [...]

“लघु कविता”

"लघु कविता" ------------------- नये घाव की क्या है जल्दी पुराना तो [...]

“हमदर्द”

कभी कभी होता है हम किसी भी जानने वाले से हम अपना दु:ख दर्द [...]

“झूठ”

" झूठ" कलयुग का महत्वपूर्ण तत्व है।सत्य कितना संभाल कर रखना [...]

“फाग”

हर त्यौहार हम सब अपनों के साथ मनाना चाहते हैं;जो बच्चे दूर [...]

बचपन

बचपन में बचपन खोना कौन चाहता है?कुछ बच्चों को रोज़ देखता हूँ [...]

“बिजूका”

"बिजूका" ------------------------- जानते नहीं , क्या होता, बिजूका? एक टाँग , पर [...]