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Author: राजेश शर्मा

राजेश शर्मा
Posts 28
Total Views 216
मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता। लेखन :- राजेश"ललित"शर्मा रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित "लाशों के ढेर पर"।"माटी की महक" काव्य संग्रह में प्रकाशित।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“लघु कविता”

"लघु कविता" ------------------- नये घाव की क्या है जल्दी पुराना तो [...]

“हमदर्द”

कभी कभी होता है हम किसी भी जानने वाले से हम अपना दु:ख दर्द [...]

“झूठ”

" झूठ" कलयुग का महत्वपूर्ण तत्व है।सत्य कितना संभाल कर रखना [...]

“फाग”

हर त्यौहार हम सब अपनों के साथ मनाना चाहते हैं;जो बच्चे दूर [...]

बचपन

बचपन में बचपन खोना कौन चाहता है?कुछ बच्चों को रोज़ देखता हूँ [...]

“बिजूका”

"बिजूका" ------------------------- जानते नहीं , क्या होता, बिजूका? एक टाँग , पर [...]

“क्षणिका”

"क्षणिका" ------------------------- अन्जान राहों का मुसाफ़िर हूँ न राह कटी न [...]

“क्षणिका”

दोस्ती कभी नहीं मिटती;दबी रहती है,मन के भीतर मौक़ा मिलते ही [...]

“क्षणिका”

क्या कुछ कहने के लिये शब्द ज़रूरी हैं?नहीं न---! ------------------------- [...]

“क्षणिका”

कभी कभी किसी के हँसने को या रोने को कोई वजह बता कर टालने की [...]

“जंगलराज”

आम नागरिक की परेशानियों को प्रतीकों के साथ गूँथ कर कुछ दोहे [...]

“वजूद”

देखें क्या हाल हो गया आदमी का रोटी कमाने में।क्या मैनें ठीक [...]

“अन्याय”

न्याय की आशा में लाखों लोग न्यायलय के चक्कर लगाते रह जाते [...]

“पोरस”

"पोरस"रो नयी पीढ़ी शायद नहीं जानती,जिसने सिकंदर जैसे योद्धा [...]

“बेटी की बेटी”

प्रस्तुत कविता मेरी बेटी के यहाँ बेटी के जन्म के कुछ दिनों के [...]

“दु:ख”

दु:ख का मतलब सुख का जाना।दु:ख को किस प्रकार अभिव्यक्ति मिली [...]

“औक़ात”

"औक़ात" ------------------------- मुझे है पता, मेरी औक़ात, तू बता ? क्या है [...]

“क्षणिका”

"क्षणिका" ------------------------- हवाओं ने फैलायी, थी तेरी आने की, ख़ुशबु [...]

“ग़ज़ल “

दो पल संजो कर रख लिये थे; तुम्हारी याद के। आये तुम उनको उठा कर [...]

“क्षणिका”

"क्षणिका" ---------------------- अब नहीं , बोलूंगा कभी, सत् । खुल [...]

“किताब”

"किताब" ------------------------- आँख बंद, कर या न कर। खुली किताब हूँ , पढ़ या न [...]

“क्षणिका”

"क्षणिका" ------------------------- अब नहीं , बोलूंगा कभी, सत् । खुल [...]

“दबे मज़दूर दबे”

साल की अंतिम कविता थोड़ी दु:खद है;पर शायद साल को और उन लाचार [...]

“हिसाब”

"हिसाब" ------------------- हिसाब----? क्या-------? मुझे सब है पता, हाशिये पर [...]

“हद”

"हद " ----------- मुझे बता , कहाँ तक, है मेरी हद। तुम्हें भी, मालूम [...]

“दो क्षणिकाएँ “

"क्षणिका" ---------------------------------------------- मैं ही निकला, कुछ कमअक्ल; वो [...]

“पोरस”

"पोरस" ------------------------- जानता हूँ , सिकंदर हो तुम; तुम अपने जहाँ [...]

“बचे खुचे रिश्ते”

बचे खुचे रिश्ते" ------------------------ "बाक़ी सब शहर बसे बचे खुचे गाँव [...]