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Author: Rajeev 'Prakhar'

Rajeev 'Prakhar'
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I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

देवी

देकर नारी-शक्ति का नारा, ये क्या ढोंग रचाते हैं l देवी से [...]

कुछ दोहे

घोर तमस संसार में, भटक रहा इन्सान l सबके अपने देखिये, अलग-अलग [...]

भाई दूज

लेकर थाली खड़ी अकेली, मुझको गीत सुना जा ना l भाई-बहिन का प्यार [...]

फिर आओ गिरधारी

घोर तमस छाया है देखो, पाप-ताप लाचारी का l चहुँ ओर है झंडा [...]

बन्दरबांट

मित्रो, प्रस्तुत है मेरी एक पुरानी व्यंग्य रचना, शीर्षक है - [...]

कुछ लघु रचनाएं

अब दुनियां में सम्बन्धों की, इक पहचान लिफ़ाफ़ा है l हर रिश्ते [...]

गंगा-स्नान

गंगा-तट पर जाकर भी ना, है पापों का भान l कौन कराएगा प्यारे, [...]

प्रश्नोत्तरी

झूठ बोल सकते हो ? नहीं साहब l चोरों लुटेरों की मदद कर सकते हो [...]

ममता

ममता देकर पीड़ा हरती, जब-जब संकट आते हैं l मानव ही [...]

प्रश्नचिन्ह (?)

गरीबी से त्रस्त और बेरोज़गारी से ग्रस्त, एक पढ़े-लिखे का [...]

मगरमच्छ

मोटे-ताजे-रसीले व्यंजनों के शौकीन, एक मगरमच्छ का दिल, एक [...]

विकास

विकास का प्रतीक इक शहर, गन्दगी में फँसा, रो रहा था l क्योंकि, [...]

कान्हा-व्यथा

कान्हा बोले यूँ मैया से, "क्यूँ कलियुग में जाऊँ मैं l जो माखन [...]

साया

हरे-भरे इक पेड़ से मिलती, हमको शीतल छाया है l लगता ऐसा, सर पर [...]

हरियाली

बहिना बोली यूँ भैया से, ना झुमका, ना लाली ला l लाना ही चाहे तो [...]

जंग

जात-पात और भेदभाव से अब लड़ने की बारी है, उठो साथियो, आज़ादी [...]

विष

राधा रानी कब तारेंगी, फिर वृक्षों की छांवों को [...]