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Author: प्रदीप तिवारी 'धवल'

प्रदीप तिवारी 'धवल'
Posts 17
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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आदमी

है हाड़, मॉस, लहू से तैयार आदमी. पानी का बुलबुला भी औ बयार [...]

नशा ! तुम्हारा सर्वनाश हो

नशा ! तुम्हारा सर्वनाश हो, तुम सबसे बढ़के पिशाच हो. अच्छे भले [...]

तुम

तुम अकुलाते मेघों की गड़गड़ाहट अरण्य में मयूरों का कलरव [...]

तुम जीवन सार हो

जब तुम्हारा विहग मन उड़ जायेगा प्रेम तरुवर की मधुरतम छाँव को [...]

बेटियाँ

बेटियाँ हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ कर रही हैं [...]

कोटा का विलाप

कोटा का विलाप जब स्व के अतृप्त अधूरे सपनों को तुम्हारी [...]

नए साल पर हों तमन्नाएं पूरी,

नए साल पर हों तमन्नाएं पूरी सिमट जाये बढ़ते हुए दिल की दूरी [...]

भ्रष्ट कहौ जौ उनका तौ बौराय जात हैं.

भ्रष्ट कहौ जौ उनका तौ बौराय जात हैं. थरिया कै अस जूँठन वै [...]

अर्थशास्त्र

भारतीय रूपये और नैतिकता की ये महानता है, दोनों के गिरने [...]

चोर चोर मौसेरे भाई।

चोर चोर मौसेरे भाई। हम नेता खाएंगे मलाई।। बोतल बदली 'धवल' हो [...]

चिड़ियाघर में सर्दी

लाल गुलाबी सर्दी आई, जर्सी स्वेटर टोपी लाई दस्ताने हाथों [...]

नोटबंदी – वरदान या अभिशाप

आम जन हूँ नोटबंदी ने सताया मोदी जी तारीख दस है पर पगार न पाया [...]

अवधी रचना- सावन माँ मन भावन है.

सावन माँ मन भावन है, शिव डमरू से फूट रही रसधारा, खेतन, बागन, [...]

हर एक शख्स समय का गुलाम होता है

हर एक शख्स समय का गुलाम होता है कभी तिनका भी उड़ता आसमान होता [...]

जबान से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती

आओ मेरी आवारगी में तुम भी शामिल हो जाओ, पाप, पुण्य, सुख, दुःख [...]

आखिरी दम तलक नहीं बुझती

आखिरी दम तलक नहीं बुझती हवस मेरी सुलह नहीं करती जब से [...]

भारत स्वच्छता मिशन

भारत स्वच्छता मिशन प्राणपन से शपथ लें हम स्वच्छता [...]