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Author: Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)
Posts 17
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ऋषभ तोमर पी .जी.कॉलेज अम्बाह मुरैना बी.एससी.चतुर्थ सेमेस्टर(गणित)

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

गीतिका

प्यार मेरा एक नदी था,वो बूँद हो गया मैं खुशियों का ताज था [...]

दो दिलो को जुदा कर गई,कॉम की ये कई बंदिशे

तेरी यादों में खोये हुये,शाम से फिर सुबह हो गई मुझको छत पर ही [...]

हो जाओ

मोहबत में गुलाब हो जाओ मंजर ए मेहताब हो जाओ इस तरह करो [...]

नही चाहता

सब कुछ त्याग कर मैं पत्थर नही बनाना चाहता इंसान ही ठीक हूँ [...]

गजल

चाहत में किसी को ठुकराया नही जाता है केवल रूह से रूह को [...]

छत पर चाँद

आज मेरी छत पर वो चाँद आया उसको देख आँखों को सुकून आया जब लबो [...]

गजल

दर्द के आलम में भी मुस्कुराया जा सकता है पत्थर पर कोमल फूल [...]

गजल

आँखो में ख्याबो को सजाती है चाहत सदा गिरते हुओं को उठती है [...]

गजल

जो जन्म से अंधा है वो देखना क्या जाने जो दिल से बेबफा है वो [...]

गजल

मेरी हर शाम खुशनुमा सी होगी जब तेरी पनाहों में ज़िंदगी [...]

गजल

आज चाँदनी रात में अंधियारी छा रही है लगता है वो छत पर बाल सूखा [...]

गजल

जमी से उस आसमाँ तक हर जगह देखलो जहाँ कोई दिल की सुनता हो उसको [...]

गजल

मुझे कुछ दूर एक मंजर नजर आता है मुझे खुद का घर जलता नजर आता [...]

तेरा साथ

तुम साथ थी मेरे जब तब बात ही अलग थी हर सुबह थी सुहानी हर साझ [...]

प्रेम की कहानी

मेरे प्रेम की कहानी मेरा दिल सुना रहा है, कभी खुल के हँस रहा [...]

समझता हूँ

तेरे लव से निकलती हर जुबां को में समझता हूँ तेरे खामोस होने [...]

दिल का परिंदा

मेरे दिल का आज़ाद परिंदा,मोहबत की गली में भटक गया हैं किसी की [...]