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Author: Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)
Posts 37
Total Views 572
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तेरी यादों का सिलसिला है

ये जो तेरी यादों का सिलसिला है बड़ा ही कठिन सा ये जलजला [...]

कैकयी

मैं कैकयी हूँ मेरा मेरा दर्द तुम क्या जानो एक स्त्री की पीड़ा [...]

तेरी आँख का काजल

घटा घनघोर से प्यारा तुम्हारी आँख का काजल घनेरी साँझ से गहरा [...]

दीवाना हुआ

तुझे देख दिल बादल हुआ है आवारा पागल दीवाना हुआ है चाँद को [...]

चाँद मेरी छत पर आया

जब वो छत पर है आया ये चाँद भी देख सरमाया कभी छुपा कभी दिखा तो [...]

झूठ तुमने दिल से कहा होता

तुम्हारी बातों से भी ये दिल खुश होता जो कही झूठ तुमने दिल से [...]

लिख देना

नफरतों के बाजारों में तुम प्यार लिख देना बिखरती जुल्फ को [...]

मुक्तक

कही नफरत कही चाहत कही मुश्किल जमाने में खुदा का नूर बसता है [...]

मौत का सामान ही तो है

आज का जानलेवा प्यार ही तो है मेरी मौत का ये समान ही तो है ये [...]

गजल

किसी अपने ने मुझे इस तरह सताया गले से लगाकर मुझे मेरा घर [...]

खत

मोहबत में उनको हमने खतों को है भेजा उन्होंने भी हमको कई [...]

मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है

मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है कभी हँसती है मुझ [...]

धरती

चारो ओर सिर्फ बदसूरत सी थी धरती कही धूल तो कही धुंआ सी थी [...]

गर्मी

चारो ओर सिर्फ बदसूरती छाई आग के गोले सी तपन लाई धूल ,धूप,धुंआ [...]

नजर आता है

मुझे हर तरफ कुछ ऐसा नजर आता है कोई अपना मुझसे खफा नजर आता [...]

बचा कुछ नही

उन्होंने जब ठुकराया तो हुआ कुछ नही सासे रही मगर ज़िन्दगी में [...]

गजल

इस सरबती बदन को जरा दिखा दे मेरे तन मन मे जरा आग लगा दे मैं [...]

मुक्तक

चारों ओर नव तृणों की बहार आ गई पर्यवरण में हर जगह मुस्कान छा [...]

आंशू

नयन नीर कह रहा है साथी मन की पीर दिल का दर्द झलकता है बन आँख [...]

गजल

वो मुझ पर सितम ढाती रही रात भर मुझको जगाती रही काश दूर होती [...]

गीतिका

प्यार मेरा एक नदी था,वो बूँद हो गया मैं खुशियों का ताज था [...]

दो दिलो को जुदा कर गई,कॉम की ये कई बंदिशे

तेरी यादों में खोये हुये,शाम से फिर सुबह हो गई मुझको छत पर ही [...]

हो जाओ

मोहबत में गुलाब हो जाओ मंजर ए मेहताब हो जाओ इस तरह करो [...]

नही चाहता

सब कुछ त्याग कर मैं पत्थर नही बनाना चाहता इंसान ही ठीक हूँ [...]

गजल

चाहत में किसी को ठुकराया नही जाता है केवल रूह से रूह को [...]

छत पर चाँद

आज मेरी छत पर वो चाँद आया उसको देख आँखों को सुकून आया जब लबो [...]

गजल

दर्द के आलम में भी मुस्कुराया जा सकता है पत्थर पर कोमल फूल [...]

गजल

आँखो में ख्याबो को सजाती है चाहत सदा गिरते हुओं को उठती है [...]

गजल

जो जन्म से अंधा है वो देखना क्या जाने जो दिल से बेबफा है वो [...]

गजल

मेरी हर शाम खुशनुमा सी होगी जब तेरी पनाहों में ज़िंदगी [...]