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Author: Purav Goyal

Purav Goyal
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जवान बेवा की जुल्फें हो गई जिन्दगी न संवारने का दिल ना बनाने का दिल

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कागज पे हालाते-दिल लिखते हुये इक दिन मौत आ जानी है

कागज पे हालाते-दिल लिखते हुये इक दिन मौत आ जानी है मुझे मरते , [...]

ख़ुदकुशी करने के मैं रोज बहाने ढूँढने लगा हूँ

ख़ुदकुशी करने के मैं रोज बहाने ढूँढने लगा हूँ जी में रड़क रही [...]

आँखों में अब आंसू छिपाना कितना मुश्किल है

आँखों में अब आंसू छिपाना कितना मुश्किल है जो रडकते है उनको [...]

आँखों की दीवारों में नमी अब बैठने लगी

आँखों की दीवारों में नमी अब बैठने लगी भीतर की सब कच्ची , [...]

आँखों में दर्द की मौजे अब मचलने लगी

आँखों में दर्द की मौजे अब मचलने लगी साँसे ही मेरी अब साँसों [...]

पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है

पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है सीने में ज़ख्म गहरा दिखाई [...]

खाकी – खद्दर पहने हुये , इंसान बिकने लगे

खाकी - खद्दर पहने हुये , इंसान बिकने लगे कोडियों में यहाँ लोगो [...]

चेहरे की उदासी को , धोने नहीं दिया इक ग़ज़ल ने

चेहरे की उदासी को , धोने नहीं दिया इक ग़ज़ल ने मुझ को देर रात [...]

सम्भाल के मुझे , किताब में कौन रखेगा

सम्भाल के मुझे , किताब में कौन रखेगा छुपा के काँटों को गुलाब [...]