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Author: Santosh Barmaiya

Santosh Barmaiya
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मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया,ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, बी.ऐड,।अध्यापक पद पर कार्यरत हूँ। मेरी रचनाएँ पूर्व में देशबन्धु, एक्स प्रेस,संवाद कुंज, अख़बार तथा पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे नवभारत अखबार में प्रकाशित होती रहती है। मेरी कलम अधिकांश समय प्रेरणा गीत तथा गजल लिखती है। मेरी पसंदीदा रचना "जवानी" l

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“हर एक दीवाना सा लगता है”

अब तो हर अपना,बेगाना सा लगता है। तेरा शहर भी गमों का,ठिकाना सा [...]

“आशिक तेरा मैख़ाने में”

कल ही मिला था,आशिक तेरा मैख़ाने में। छलका रहा था गम,भर-भर के [...]

“महिला शिक्षा की करामात”(एक व्यंग्य)

अभी नींद भी न खुली थी!और जोर की आवाज आई! ऐ मिस्टर! हैलो, गुड [...]

“तुम, मुझे याद करके देखना”

बिछड़ी हुई गलियों से, आज फिर गुजर के देखना। तन्हा ना कहोगे [...]