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Author: preeti tiwari

preeti tiwari
Posts 29
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जज्बातो को शब्दो मे उकेरने का प्रयास है मेरी लेखनी ही मेरे होने का एहसास है

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

पत्थर ही पत्थर

पत्थर पर बैठी एक औरत पत्थर को ही तोड रही है तोड तोड कर पत्थर [...]

नारी

औरत ने जन्म दिया मर्द को,कभी किया न अभिमान मर्द ने जाने कब [...]

बनावट

बनावट की है दुनिया,यहां बस तमाशा कीजिए अच्छे इंसा नही तो [...]

औरत

निकलती है ज्यों ही औरत कमाने को आ जाते है सभी,हाथ आजमाने [...]

दिवाली दिलवाली

आओ कुछ अलग सी मनाये दिवाली ना शोर, न धमक, न धमाके वाली कुछ [...]

बूढी दिवाली

इक दूजे से पूछे दो बूढी नजरे सवाली आयेगा बेटा क्या ,चंद रोज मे [...]

मेरा रावण मित्र

आज हमारे एक लेख पर कियामित्र ने प्रश्न क्यों इतना गंभीर लेख [...]

अहम की पोटली

सुनो अहम की जो पोटली है तुम्हारे पास फिरते हो जिसे लिये दिन [...]

आकर राधे देख लो

आकर राधे देख लो तुम कलयुगी संसार नारी का मान करे नही वो कैसे [...]

तमन्नाओ की बन्दिशे

तमन्नाओ की बन्दिशे अब गायी नहीं जाती मुहब्बत के शेर सब औंधे [...]

एहराम

वो कोई और नाम लिख रहा था मेरे नाम पर परदा डाल दिया मेरे वजूद [...]

रूह का हिस्सा

आंख के आंसू है......दरिया नहीं जो सूख जायेगा तुम उतार [...]

मौसम

इन आंखो मे बरसात का मौसम न मिलेगा तुम लौट के आओगे तो सावन न [...]

बीमार कलम

कोई नहीं जानता पर मै जानती हूं बहुत अच्छा नहीं पर मै लिखती [...]

मेरा आंचल

आंचल गर बेरंग हो तो उम्मीद रहती है गर हो जाये बदरंग तो क्या [...]

रिश्ता दर्द का

गैरो से कहकर वो ,दर्द मे सुकून पाते है रिश्ता हमसे है दर्द का [...]

विचारो की गंगा

कब से मेरी रगो मे तू घूमती रही प्रतिकूलता के कारण बाहर न आ [...]

जरूरत

कौन है इस दुनिया में जो दूध का धुला हो जिसके स्वभाव मे ...धरती [...]

स्वप्नलोक

महज स्वपनलोक की सैर से उत्पन्न कविता सदियों से एक सपना है... [...]

झरोखा

जिन्दगी के हर पहलू मे मैने तुझको मुडकर देखा जैसे किसी बन्द [...]

लौहपरी चाहिए

मिट्टी के शहज़ादों को लौह परी चाहिए देखने सुनने में मदभरी [...]

जिन्दगी

जिन्दगी ये जिन्दगी अक्सर हमे ऐसे मोड पर लाती है.. जहां कुछ [...]

यूं जीना

असल मजा आरहा है जीने मे....... मुस्कान बिखेरने और अश्क पीने [...]

घडी भर

घडी की सुइंया हर रोज उस घडी मिलती है ......जिस घडी हम मिला करते थे [...]

टूटना

टूटकर बिखर जाना,.......समेटना आसान है... यूं दरारो में [...]

मुखौटा

नोंच लेती गर मुखौटा चेहरे पे होता उसने पूरी शख्सियत पे पर्दा [...]

प्रतिध्वनि

कहते है हर शब्द की प्रतिध्वनि सुनाई देती है मैने तो नित [...]

जख्म

वो आया था मेरे जख्मो को देखकर.......मरहम लगाने एक नासूर [...]

मेरा प्रेम

शब्दो के जोड तोड से गणित की तरह जो हल किया जाये नही है वो [...]