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Author: pratik jangid

pratik jangid
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कविता (6 Posts)


माँ झूट बोलती है ।

माँ झूट बोलती है । सुबह उठाने के लिए 7 बजे के time को 8 बताती [...]

इम्तेहान

जिंदगी की जंग में हर कदम हर मोड़ पर इम्तेहान होता हैं ! तब जाकर [...]

“लाडली बिटिया “

हर कदम पर माँ बाप का सहारा बन जाती हे ! हर घर आगन को रोशन का [...]

WELCOME 2017

अरसा हो गया मुझे बदले , अब तो मुझे बदलने दो ! कभी पन्ना बदला [...]

एक अजनबी हमसफर बनने वाला हे !

कुछ पल का साथ अब हर पल का होने वाला हे ! देखते ही देखते एक अजनबी [...]

ये आंखे

अन कहे शब्दों को बयां कर जाती हें I एक अजनबी से ये आंखे न जाने [...]