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Author: pratik jangid

pratik jangid
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

एक कहानी

आज बरसो बाद अपने शहर अपने गाँव जाने की खुशी ओर माँ से मिलने की [...]

वो एक सीधी सी लड़की…..

तुम चुप थी तलाब की तरह । फिर लहरो की तरह बहने लगी ।। तुम खुश [...]

उलझन

मेरी बातो को इस कदर ना समझना की मे तुमको उलझा रहा हु । बस इतना [...]

इम्तेहान

जिंदगी की जंग में हर कदम हर मोड़ पर इम्तेहान होता हैं ! तब जाकर [...]

“लाडली बिटिया “

हर कदम पर माँ बाप का सहारा बन जाती हे ! हर घर आगन को रोशन का [...]

WELCOME 2017

अरसा हो गया मुझे बदले , अब तो मुझे बदलने दो ! कभी पन्ना बदला [...]

एक अजनबी हमसफर बनने वाला हे !

कुछ पल का साथ अब हर पल का होने वाला हे ! देखते ही देखते एक अजनबी [...]

मुझे याद हे

मुझे याद हे जब तुम मेरा हाथ मांगने आये थे I थोडा घबराये और [...]

में भी कुछ करना चाहता हु

में भी कुछ करना चाहता हु , इक हुनर में भी सीखना चाहता हु, कुछ [...]

ये आंखे

अन कहे शब्दों को बयां कर जाती हें I एक अजनबी से ये आंखे न जाने [...]

बेताब कलम

कलम भी चलने को बेताब हे . और लब्ज होटो से फिसलने को , अब तो कागज़ [...]

आज जो यु मिले हो तुम , थोडा अपने से लगे हो तुम

आज जो यु मिले हो तुम , थोडा अपने से लगे हो तुम ये ख़ामोशी कुछ [...]