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Author: Prashant Sharma

Prashant Sharma
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“सियासत”

सियासत का बस धर्म एक,सत्ता मिलें बस यार। मैं बैठा बेटा [...]

“अहंकार”

अहंकार से ना बचें, राजा रंक फकीर। दूजे सह खुद भी मिटें,घात होय [...]

“नयी सोच”

गीता और कुरान बना लो नयी सोच को, रामायण का गान बना लो नयी सोच [...]

“शब्द आराधना”

शब्द -आराधना करके बनता है महान मानव इससे ही सुनता है भाव [...]

“सच बेगाना”

मौसम की बहार में अब दगन हो गयी। दिलो में जेठ सी जलन हो गयी। पर [...]

“दीपक”

जिनके हो विचार ऊंचे ,कदम तो खुद बा खुद बढ़ जाते हैं। जग रोशन [...]

“मेरी जिंदगी”

मेरी जिंदगी कटीली झाडियो की उलझन बन गयी है। मानो डलियो की [...]

“मां”

माता सिंह पर सवार उनके नव अवतार। सुबह शाम उनको नमन हम करते [...]

“जिंदगी”

जिंदगी हमेशा मजबूर नहीं होती। किस्मत हमेशा भरपूर नहीं [...]

“हिंद की जय”

एक चिड़िया आसमां में,पंख फैला उड़ रही। हिंद की जय, हिंद की [...]

गधे का दर्द

एक गधे ने ब्रह्याजी को अपना अपना दर्द सुनाया। ब्रम्हण मुझ [...]

“युवा प्रेरणा”

हे युवा जाग कुछ करके दिखा दे कर्म ऐसा कर सारे जग को हिला [...]

“होली”

होली खेलो यार मीत ,यह बात मैं दिल से करता हूं। रंग में भर के [...]

प्रकृति

बादलों की गरजती ध्वनि में,बरसा की छमछम सुहानी लगती है [...]

“बाबुल का आंगन”

बाबुल का आंगन लगे ,प्यारा जहां बीता बचपन सारा। याद आती मेरे [...]

“संघर्ष”

संघर्ष करो संघर्ष करो संघर्ष हमारा नारा हो। जीवन पथ पर बढे [...]

“मानव”

मानव सृष्टि की सुंदर रचना कदम-कदम पर हमें है बचना। कर्म सदा [...]

बेटी

बेटा होता घर का लाडला तो बेटी लाडली होती है। बेटा मानो फूल है [...]

बेटी

बेटा होता घर का लाडला तो बेटी लाडली होती है। बेटा मानो फूल है [...]