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Author: Dr. pragy Goel

Dr. pragy Goel
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देह शब्द है भाव आत्मा यही समुच्चय मेरा परिचय

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुस्कुरा के जियो

डर के नहीं मुस्कुरा के जियो प्यार को दिल में समों के जियो हाथ [...]

वो तेरी एक भूल

सुबह उगते हुए सूरज से मैंने पूछा यहां जो उग रहा है तू कहीं तो [...]

कैसे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा है?

जिस देश का कानून खड़ा है जैसे हो अंधा और पुलिस थानो में हो [...]

सत्य

सत्य की खोज में निकल आया था सागर के पार जाने कितने पथ और मेरे [...]