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Author: प्रदीप कुमार गौतम

प्रदीप कुमार गौतम
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शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0) साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए साहित्यिक हिस्सा बनकर एक मात्र पहल कर रहा हूँ ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आरएसएस नंगा नाच रहा ।

लोकतंत्र पर देखो भाई आरएसएस नंगा नाच रहा अपनी बात को रखने पर [...]

विनाश कर लिया

विकास की राहों में सड़कों का निर्माण पर पेड़ो की कटान को हर पल [...]

कब्रिस्तान न बन जाएं

मानवीय संवेदनाओं का मानव से ह्रास हो रहा है लूट का [...]