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Author: पूनम झा

पूनम झा
Posts 66
Total Views 1,952
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“विदाई”

एक जन्म से विदा होकर मानव माँ के कोख में आता है, माँ का कोख [...]

” भूख और बादाम “

"अरे मुनिया चल । यहाँ क्यों खड़ी है ?"--झुनकी बोली । मुनिया --"सेठ [...]

” रेगिस्तान “

" सबके गहने और साड़ियाँ फीकी पर जाती है किटी में रोमा के सामने [...]

कब आओगे मोहन

कब आओगे मोहन सुन मेरे प्यारे कृष्णा। तेरे बिना सूना [...]

” बदल गए “

" नीतिन तुम ये क्या कर रहे हो ? उलटे-सीधे काम कर रहे हो । कभी [...]

” बदल गए “

" नीतिन तुम ये क्या कर रहे हो ? उलटे-सीधे काम कर रहे हो । कभी [...]

** गजल **

आज कुछ शब्द बेनाम लिखूँ । अंतर्मन में उठते संग्राम लिखूँ [...]

** गजल **

बहते थे अश्क जो तेरा प्यार पाने के लिए । रोक दिया उसे लबों को [...]

** गजल **

लेखनी का सिर्फ सच आधार है। सच नहीं तो लिखना निराधार [...]

** गजल **

चलो प्रकृति के नजदीक चल के देखते हैं। सुबह के सुहाने मौसम [...]

** मुक्तक **

रिश्ते एक तरफा, निभाये नहीं जा सकते। फिर भी कुछ रिश्ते, [...]

** गजल **

कहते थे अपना पर, कहो क्यूं अब मैं बेगानी हो गई। जो कसमें खायी [...]

**गजल**

तुम तो जीते हो अपनी खुशी के लिए। हम खुश हो लेते,तुम्हारी हँसी [...]

** गीतिका **

हे सूर्य, क्यों अपनी उष्णता बढ़ा रहे हो। धीरे-धीरे अपना उग्र [...]

** गीतिका **

भवन सुंदर लगता दिखने में । अच्छा लगता उसमें रहने में [...]

** गीतिका **

जिंदगी लगती कभी सीधी तो,कभी आरी है। पूरी जिन्दगी इस गुत्थी [...]

** गीतिका **

जिंदगी लगती कभी सीधी तो,कभी आरी है। पूरी जिन्दगी इस गुत्थी [...]

नारी तुम अपनी पहचान करो ।

नारी तुम अपनी पहचान करो । उठकर अपना सम्मान करो । अबला नहीं [...]

** जिंदगानी **

जिन्दगी की तो अपनी ही कहानी है। कहा सबने पर किसने इसे मानी [...]

“आओ अधरामृत पान करें ।”

मैं छल प्रपंच न जानूँ प्रिये, उर प्रीत को ही मानूँ [...]

*** गीतिका ***

उपवन में पुष्प खिले-खिले, सब महकने के लिये । गगन में घुमड़ते [...]

” वेलेंटाइन डे “

" वेलेनटाइन डे " ------ प्रेम के मायने जानता नहीं, वैलेनटाइन डे [...]

** मुक्तक **

साथ चलने वाले भी दिल से साथ नहीं होते हैं चेहरे पर मुस्कान, पर [...]

वसंत ऋतु…………

वसंत ऋतु ---- वसंत ऋतु जब आये पुष्प पुष्प मुस्काये पीतांबरी [...]

जय माँ सरस्वती

हे वीणावादिनी, हे हंसवाहिनी, हे ब्रह्मचारिणी, हे [...]

जय हिन्द जय भारत

" वन्दे मातरम " ---------------- तिरंगा ऊंचा रखना धर्म हमारा है। तिरंगे [...]

” खेल शब्दों का “

शब्द से मिले गर मान सम्मान , तो कहीं शब्द करा दे अपमान । शब्द [...]

दिल से तुझे जाने न दिया। *

वक्त को भी बीच में आने न दिया। देख लो दिल से तुझे जाने न [...]

” बेटियां “………….

" बेटियाँ " ------------ ये पूछो मत मुझसे क्या होती है बेटी न शब्द न [...]

**मुक्तक **

लेनी-देनी ----------- साथ तो यहाँ से कुछ न जानी करते फिर भी सब [...]