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Author: ISHWAR DAYAL GOSWAMI

ISHWAR DAYAL GOSWAMI
Posts 54
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

ग़ज़ल

मिले कहीं पर बात हो जो लाज़मी ले जाईये । खोजकर कोई भीड़ में से [...]

शायद ! तुमने मुस्काया है. (नवगीत)

स्वच्छंद गगन , सुरभित है चमन, शायद ! तुमने मुस्काया है [...]

गीतिका

अगर चाहता है तू खुशियाँ ,दुख तुझको सहना होगा । बैठे-बैठे [...]

भजन (ग़ज़ल)

""""""" ग़ज़ल """''"""'" तुम्हारा प्यार प्यारा है,जो मेरे दिल को भाता है [...]

तन्हाईयां (ग़ज़ल)

ज़िन्द़गी का हौस़ला , तनहाईयाँ । काव्य की सुंदर कला, [...]

राष्ट्र-भक्ति गीतिका

शस्य-श्यामला इस धरती को , बारम्बार प्रणाम है । हरे-भरे-से इन [...]

ग़ज़ल

ज़मानें ये जब भी ज़मानें न होंगे । तराऩें ये तब भी पुरानें न [...]

वक्त आ गया है जबाव का

वक्त आ गया है, जब़ाब का । हुए बहुत दिन घिसते-पिसते , वेईमानी [...]

ग़ज़ल

एक नेता ने कहा है, आएंगे अब दिन अच्छे । प्यार के गीत ही गाएंगे, [...]

फाग गीत

आओ मिलकर गाएं फाग । छेड़ें समरसता का राग । । हुए बहुत दिन [...]

वसंत का स्पर्श

वसंत का स्पर्श अब आनंद नहीं है आदमी की आँखों में । 'जले पर [...]

अपने बेटे के लिए ( समकालीन कविता )

बेटे ! मेरी रफ़्तार के लिए तब्दील होते थे दुनियाँ की [...]

बेटियाँ

दो नदियों का मेल कराती हैं बेटियाँ । प्यार की धारा ही बहाती [...]

ग़ुजरा साल पुराना

नई-नई सौगातें देकर, ग़ुजरा साल पुराना । नोटों को भी बंद करा [...]

आदमी (नवगीत)

नवगीत श्याम-पट पर अक्षरों-सा नहीं चमकता आदमी । अक्षरों [...]

हवा

बह रही अंदर हवा है । चल रही बाहर हवा है । वक्त के द्वारा जो [...]

नोट-बंदी

हर तरह से हर गति अब आज मंदी हो गई । जब से मेरे देश में ये , [...]

नवगीत

शिशिर अब, रोमांस नहीं , गुनगुनाती धूप में । आँख की गहराई में [...]

ज़िंदग़ी सिगरेट का धुआँ (नवगीत)

ज़िंदग़ी सिगरेट का धुआँ । कहीं खाई, कहीं कुआँ । ज़रदे जैसी [...]

कचरे का ढेर

कमाया , ठीक कमाया और बहुत कमाया ; नाम भी , धन भी । अपनी कला से [...]

जंगली और पालतू कुत्ते की मित्रता (व्यंग्य- कविता)

जंगल से इक आया कुत्ता । बूटी मुँह में दाबे कुत्ता । उसे देखकर [...]

आज दुनियाँ बन गई बाजार है. (गीतिका)

गीतिका छंद-आनंद-वर्धक, मापनी- २१२२,२१२२,२१२ [...]

यश के पाँवों में छाले हैं

जो भी घर के रखवाले है, उनके होंठों पर ताले हैं । धूल सभ्यता की [...]

अपनी बिटिया के लिए ।

चौपाई आधारित गीतिका । 16,16 मात्राओं की यति पर चार [...]

लेखनी. (हिंदी ग़ज़ल)

कर्तव्य का ही बोध , कराती है लेखनी । इस देह को मनुृष्य , बनाती [...]

ग़ज़ल

द्वेष-भाव के काफ़िले हैं । मज़बूरी में प्राण हिले हैं [...]

मेरा हर्ष मनाया जाए (शाश्वत-गीत)

जिस दिन मैं दुनियाँ से जाऊँ, मेरा हर्ष मनाया जाए। हुए बहुत [...]

समझौता

लड़की, बीड़ी की टोकरी लिए जाती है, कारख़ाने रोज़-ब-रोज़ [...]

ग़ज़ल

ख़ूब़सूरत ग़ुनाह हो जाए। दिल ये उन पै तब़ाह हो जाए। फ़लसफ़े [...]

अपेक्षायें

भाईयों-बहिनों को चाहिए, भाई ज़िम्म़ेवार। माता-पिता को [...]