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Author: Raj Vig

Raj Vig
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

जो किये थे कसूर

अपमान किया है उसने किसी का बेआबरू कर दिखाया है गरूर दी है [...]

कल्पना से परे

कल्पना से परे जो जहान है मिले तुझे ये मेरा अरमान है फूलों से [...]

कितना वो गरीब हुआ करता था

गुजरा जब मै उस बस्ती से जहां वो रहा करता था रोंगटे मेरे खड़े [...]

पन्ने

मिटा दिये हैं मैने रूलाते थे बहुत जब याद आते थे अतीत के [...]

नमन करूं द्वार तेरे मै पावन

निर्मल हुआ है तन मन उज्ज्वल हुआ है जीवन चरणों मे जब मिली शरण [...]

नरक का दंड

कर्मो का समय जब मेरा पूरा हुआ प्रभु के आदेश से यमराज दूतों [...]

क्यूं प्यार को तरसा रही है

दिल से ये आवाज बार बार आ रही है जितना मै तुझे चाह रहा [...]

खिल उठा है कमल

खत्म हुआ है सिलसिला अब बातों का आ गया है वक्त कछ कर जाने का [...]

जिन्दगी

माया के चक्र मे भ्रमित है हर इक जिन्दगी अधूरी इच्छाओं से [...]

मुकद्दर से हारा है तू

दामन को आंसुओं से कयूं भिगोता है तू कर्मो से नही मुकद्दर से [...]

दोस्त

बदला है रूप जिन्दगी ने दोस्तों ने चेहरे बदल लिये चलते थे जो [...]

रूप गज़ब है

ख्वाब लिये मै आंखों मे पहुंचा हूं उन गलियों मे जहां नाम [...]

सड़क किनारे

सिसकता सुबकता वो सारी रात रहा दो रोटी की जुगाड़ मे भटकता वो [...]

21वीं सदी का इन्सान

गली मे आज फिर लगी है भीड़ कत्ल हुआ है इन्सानियत का देखती रह [...]

गमो का बोझ

गमो का बोझ जब दिल से उठाया न गया आंखों से अश्कों का राज़ भी [...]

एक बार

करता रहा मै जिन पलों का इंतजार जिंदगी मे लौट कर नही आए, एक [...]

यादों के झोकें

यादों के तेरे जब झोकें चले आते हैं सांसों मे तेरी महकों के [...]

उम्र होगी जब आपकी

उम्र होगी जब आपकी लिखने की ख्वाहिश होगी आपकी एक हाथ मे कापी [...]

आंखें

मोटी मोटी बड़ी बड़ी वो खूबसूरत आंखें सुन्दर चेहरे पे लगती वो [...]

मेहनत के फल

गलती करते करते पहुंचेगा वो उस रस्ते जहां मिल जायेंगे उसे [...]

खूशियों के पल

जी भर के आज वो मुस्कराया है बाद मुद्दत के खूशियों का पल झोली [...]

जीवन की बाजी

पल दो पल के जीवन मे क्या खोया, पाया मैंने इन सब बातों को मै [...]

अजनबी

गुजरते हुए पल बोझिल से लग रहे हैं आशाओं के दीपक बुझते से लग [...]

दूर बहुत

दूर बहुत कोई चला गया न जाने कौन सी दुनिया मे वो बसर गया अपना [...]

गांव गांव मे शहर

गति प्रगति की तेज हो गयी रात दिन चौगुनी हो गयी नयी दिशा की [...]

प्रभु संदेश

प्रभु के दरबार मे आज इंसाफ हो रहा था दूध दूध पानी पानी हिसाब [...]

तेरा साथ

तू पास रहे या दूर रहे दिल मे बस तू वास करे जन्म जन्म तुझे [...]

राहें

खुद ब खुद बदल गयी हैं राहें मंजिल का पता बता रही हैं [...]

फेरा

कुछ नही जाना साथ मे मेरे न पैसा न बंगले मेरे न काया न बंदे [...]

सुबह सुहानी

किताबों मे खो जायेगी इक दिन मेरी कहानी घड़ियों की रफ्तार मे [...]