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Author: पंकज परिंदा

पंकज परिंदा
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

अगर तू दर्द सबका जान लेगा….

अगर तू दर्द सबका जान लेगा ख़ुदा तेरी रज़ा पहचान [...]

मेरा है आशियाँ जो जल रहा है…

ज़नाज़ा हसरतों का चल रहा है जवानी का जो सूरज ढल रहा है। कहीं [...]

बिना माँ के जीवन गुज़ारा बहुत है…

मिला जख़्म हमको क़रारा बहुत है बिना माँ के जीवन गुज़ारा बहुत [...]

अब तो मेरा हिसाब कर दो ना…!

🌻🌻🌻🌻🌻🌻 ग़ज़ल 🌻🌻🌻🌻🌻🌻 काम तुम बेहिसाब...., कर दो ना छूके मुझको [...]

क़ैद में रो रहा उजाला है…

उनके चेहरे पे तिल जो काला है उसने कितनों को मार डाला [...]

जब हक़ीक़त झूठ से टकरा गयी…

जब हक़ीक़त झूठ से टकरा गयी सल्तनत तब झूठ की घबरा [...]

जान लेती है कसम से ये नज़ाकत प्यार की

जान लेती है कसम से ये नज़ाकत प्यार की खेलना जुल्फों से' तेरा [...]

शून्य सा अवशेष मैं…

इन शून्य विहीन आँखों से जब निहारता में शून्य को, तो शून्य सा [...]

नफ़रतों में घुल रही ये जिंदगी है

नफ़रतों में घुल रही ये जिंदगी है अन्जुमन में हर तरफ बस [...]

बिटिया मेरी सोन चिरैया…!

◆ मधुशाला छन्द (रुबाई) ◆ आँगन की वह वृंदा मेरी या लगती [...]

बेदर्द ज़माने ने क्या खूब सताया है…

बेदर्द ज़माने ने क्या खूब सताया है मज़लूम सर-ए-महफ़िल [...]

पंख कटा हूँ एक परिंदा

जब जब हमको याद करोगे रोओगे फ़रियाद करोगे। कैद़ रहे [...]

बेटियां

फूल सी खुश्बू लुटातीं बेटियां जब कभी भी मुस्कुरातीं [...]