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Author: NIRA Rani

NIRA Rani
Posts 54
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कौन किसे पनाह देताहै

कौन किसे पनाह देता है पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है वाकिफ [...]

मुहब्बत के व्यापार मे

आज मुहब्बत का अजब फरमान आया जिंदगीको रगंमच और मुझे कठपुतली [...]

नारी दिवस की बधाई

ईश्वर की खूबसरत संरचना हूं मै एक नारी हूं गुरूर है खुद पर [...]

कचरे मे जीवन तलाश रहा था

कॉधे पर उसके एक थैला था ऑखें उसकी स्याह / मुख मलिन और मैला था [...]

समसामयिक घटना पे वार कर रही हूं

तीर शब्दो के बना कर लेखनी मे धार कर रही हूं कुछ नही बस सम [...]

मॉ….सचमुच मॉ पत्थर सी हो गई है .

कहते है दिल की बात जुबॉ पर न लाओ तो दिल पर अंकित हो जाती है दिल [...]

तुम्हे

एक लम्तुहात गुजरने से पहले इश्क के जज्बात मे पिघलने से पहले [...]

मकर संक्रान्ति मुबारक बच्चे

जब से परिंदों ने खुद के शौक को जामा पहनाया है तब से हमारी [...]

बेटियॉ

बेटियॉ .. वेदों की माने तो गाथा हैं वो किसना के साथ भोली राधा [...]

नव वर्ष मुबारक

ऊषा की पहली किरण मुस्कराई आज फिर एक नया सबेरा लाई कुछ नई [...]

.. या खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

शिद्दत से ख्वाहिश है दिल की खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे पर [...]

जिंदगी मुझ पर लिखती है

मै जिंदगी पर लिखती हूं जिंदगी मुझ पर लिखती है कभी वो मुझ पर [...]

जी लेना चाहती हूं

मै भी देखना चाहती हूं एक अलसाई सी गुलाबी सुबह .. रजाई मे खुद [...]

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुची हूं

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुंची हूं अंगार अधर पे धर कर [...]

अपने वजूद की पहचान कर चला है

आज दिल फिर से मुकम्मल हो चला है तेरे यादो की गली से मुह मोड़ [...]

लो काला धन बचाय

कहे कबीरा आज तक धन को रहत लुकाय पल भर मे घोषित करो सब कोई [...]

गैरो मे कहॉ दम है ..अपने ही चोट दे जाते हैं

क्या हुआ कुछ वक्त के थपेड़ो ने कमजोर कर दिया टूटा तो वो पहले [...]

धुंध की चादर मे शहर सिसक रहा है

न जाने क्यू दिल मे कुछ हलचल हो रही थी द्वार पे जाकर देखा तो इक [...]

गरीबी

गरीबी गरीबी … गरीबी भी कितनी अजीब है शायद ये ही उनका नसीब [...]

दिया जलता रहा

दिया जलता रहा सचमुच दिया जलता रहा घनघोर स्याह रात थी हॉ [...]

अश्को का अक्स नजर आया है

अक्सर खुद को खुद से फरेब करते पाया है दिल मे कुछ जुबॉ को कुछ [...]

बर्फ का गोला

आज फिर वही तपती दोपहर थी वही पगडंडी थी .वही गर्म रेत थी नही [...]

जीने के बहाने ढूढ़ लेती है जिंदगी

एक जिदगी कई फसाने ढूढ़ लेती है . कुछ अच्छे तो कुछ बुरे अफसाने [...]

रंगों केअर्थ बदलते है ..

रिश्तों के रंग बदलते है कुछ गहरे कुछ फीके पड़ते है मन की [...]

सशक्त होती आज की नारी

स्वयं की शक्ति को संगठित कर सशक्त होती आज की नारी [...]

कुछ वक्त साथ ले आउँ !!

फुर्सत हो तो मैं आउँ कहो तो कुछ वक्त साथ ले आउँ तुम्हे वक्त [...]

कोई आज ..कोई चार दिन बाद

जिंदगी जितनी गुजरी है कुछ कमाने मे उससे कहीं ज्यादा गुजरी [...]

फौजी की बीवी …..दे दो वक्त को मात

क्या हुआ जो बिछड़ गई तुम क्या हुआ जो बिखर गई तुम क्या हुआ जो [...]

लाल बिंदी …

माथे पर मॉ लाल बिंदी लगाती थी बस उसी से मॉ समर्पित दिखलाती थी [...]

सच्चे प्रहरी हो …

चैन से हम सो सके इसलिए तुम गश्त लगाते हो शेर की मॉद मे घुसकर [...]