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Author: NIRA Rani

NIRA Rani
Posts 63
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

यादों की गठरी

सपनो के ताने बाने है कुछ अरमान पुराने है इक यादों की गठरी [...]

जहॉ पसरा हो मेरा नाम

आओ सौंप दूं तुम्हे अपनी हसरते अपने अरमान अपने सपने अपना मकाम [...]

मै क्या लिखूं

कुछ हास लिखूं परिहास लिखू या मन के कुछ जज्बात लिखूं अम्बर [...]

दोस्तो से भी मिला करो

सबके अपने दुख सुख है सबकी अपनी पीड़ा है जीवन चक्र के पहिए मे [...]

तूफॉ मे कश्ती

न मॉझी न हमसफर न हक मे हवॉए तूफॉ मे कश्ती बर्फीले सदाए चाहतो [...]

पापा तुम तस्वीर मे रहते हो

कहते है पापा घर मे रहते है पर वो कमरे मे नही तस्वीरो मे रहते [...]

मॉ

मॉ तुझे कुछ शब्दो मे व्यक्त कर दू ..... कभी हो नही सकता तेरी [...]

बूढ़ी उम्मीदे चौखट पर रोज दिया जलाती है

बूढ़ी उम्मीदे चौखट पे रोज चिराग जलाती है मन मे न जाने कितने [...]

तू मुझमे है मैतुझमे हूं

प्रथम मिलन की बेला मे कुछ ऐसा अपनापन सा था कुछ नजर नजर की [...]

कौन किसे पनाह देताहै

कौन किसे पनाह देता है पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है वाकिफ [...]

मुहब्बत के व्यापार मे

आज मुहब्बत का अजब फरमान आया जिंदगीको रगंमच और मुझे कठपुतली [...]

नारी दिवस की बधाई

ईश्वर की खूबसरत संरचना हूं मै एक नारी हूं गुरूर है खुद पर [...]

कचरे मे जीवन तलाश रहा था

कॉधे पर उसके एक थैला था ऑखें उसकी स्याह / मुख मलिन और मैला था [...]

समसामयिक घटना पे वार कर रही हूं

तीर शब्दो के बना कर लेखनी मे धार कर रही हूं कुछ नही बस सम [...]

मॉ….सचमुच मॉ पत्थर सी हो गई है .

कहते है दिल की बात जुबॉ पर न लाओ तो दिल पर अंकित हो जाती है दिल [...]

तुम्हे

एक लम्तुहात गुजरने से पहले इश्क के जज्बात मे पिघलने से पहले [...]

मकर संक्रान्ति मुबारक बच्चे

जब से परिंदों ने खुद के शौक को जामा पहनाया है तब से हमारी [...]

बेटियॉ

बेटियॉ .. वेदों की माने तो गाथा हैं वो किसना के साथ भोली राधा [...]

नव वर्ष मुबारक

ऊषा की पहली किरण मुस्कराई आज फिर एक नया सबेरा लाई कुछ नई [...]

.. या खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

शिद्दत से ख्वाहिश है दिल की खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे पर [...]

जिंदगी मुझ पर लिखती है

मै जिंदगी पर लिखती हूं जिंदगी मुझ पर लिखती है कभी वो मुझ पर [...]

जी लेना चाहती हूं

मै भी देखना चाहती हूं एक अलसाई सी गुलाबी सुबह .. रजाई मे खुद [...]

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुची हूं

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुंची हूं अंगार अधर पे धर कर [...]

अपने वजूद की पहचान कर चला है

आज दिल फिर से मुकम्मल हो चला है तेरे यादो की गली से मुह मोड़ [...]

लो काला धन बचाय

कहे कबीरा आज तक धन को रहत लुकाय पल भर मे घोषित करो सब कोई [...]

गैरो मे कहॉ दम है ..अपने ही चोट दे जाते हैं

क्या हुआ कुछ वक्त के थपेड़ो ने कमजोर कर दिया टूटा तो वो पहले [...]

धुंध की चादर मे शहर सिसक रहा है

न जाने क्यू दिल मे कुछ हलचल हो रही थी द्वार पे जाकर देखा तो इक [...]

गरीबी

गरीबी गरीबी … गरीबी भी कितनी अजीब है शायद ये ही उनका नसीब [...]

दिया जलता रहा

दिया जलता रहा सचमुच दिया जलता रहा घनघोर स्याह रात थी हॉ [...]

अश्को का अक्स नजर आया है

अक्सर खुद को खुद से फरेब करते पाया है दिल मे कुछ जुबॉ को कुछ [...]