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Author: निहारिका सिंह

निहारिका सिंह
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स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

नारी : मातृभूमि

सुकुमार कुमुदिनी , लिए कृपाण , नयनों में लिए बदले के बाण । पति [...]

हिन्दी : माँ

स्वयं में सम्पूर्णता है हिन्दी हमारा गर्व हमारा [...]

पतझड़

लो फिर आ गया ..पतझड़ का मौसम फिर पत्तों से पेड़ों की बेरुखी [...]

नारी

मैं विवश नही अब , मैं आदिशक्ति की ज्वाला हूँ । मैं हूँ अमृत [...]

हिन्द की बेटी

मैं हिन्द की बेटी सरफ़रोशी का ताज रखती हूँ हृदय में [...]

वीर भाई

हमारी रक्षा की जो कसमें खायीं हैं , वो वहाँ सरहद पर खड़ा निभा [...]

लखनऊ

विकास में तत्पर लेकिन , अपने संस्कारों में रमा है लखनऊ [...]

समर्पण

तुम संपूर्ण देश की आशा हो , तुम प्रति प्रस्फुटित भविष्य की [...]

जाग रहा है हिन्दुस्तान

आज विदेशों में भी अपना , गूंज उठा जन-गण-मन गान । अपनाकर पुनः [...]

मैं बेचारी

मैं बेचारी हे कृष्ण ! तुम्हारी । मैं मीरा तेरे दरस की प्यासी [...]

कृष्णा मेरा प्रेम

।।1।। श्याम श्याम जपते मैं ऐसी खो जाऊँ। दूँ वीणा पे तान मैं [...]

स्वाभिमान

हाँ ! ठीक सुना तुमने नही चल सकती अब , एक और कदम तुम्हारे साथ [...]

कृषक

गरीबों को मोहताज अन्न के दाने हो रहे घर में चूहे जले ज़माने हो [...]

आत्मनिर्भरता

दहलीज के आधार ,पर स्त्रियों पर संस्कार के मानक तय हैं समाज के [...]