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Author: नीरजा मेहता 'कमलिनी'

नीरजा मेहता 'कमलिनी'
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बड़े-बड़े साहित्यकारों की रचनाएँ पढ़कर लिखने की इच्छा जागृत हुई और उन्हीं की प्रेरणा से लिखना प्रारम्भ किया। कई वर्षों तक डायरी तक ही सीमित रही किन्तु धीरे-धीरे पत्र-पत्रिकाओं से मैं आगे बढ़ी और कई साझा संग्रह में जुड़ी। जब दो शोध ग्रंथों के लिए लिखी गयी पुस्तकों से जुड़ी तब साहित्य को नया रुख मिला और उसके बाद मेरे तीन एकल काव्य संग्रह प्रकाशित हुए। साहित्य सेवा ही मेरे जीवन का उद्देश्य है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“मधुमास”

मधुर मधुर मधुमास खिला मन पुलकित उल्लास मिला। भासमान है [...]

बेटियाँ——–“सुन रहे हो बाबा”

एक बेटी की बात अपने पिता से—- सुन रहे हो बाबा ! जगाये थे जब [...]

बेटियाँ——–“सुन रहे हो बाबा”

एक बेटी की बात अपने पिता से---- सुन रहे हो बाबा ! जगाये थे जब [...]