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Author: Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan
Posts 57
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आदमी की औक़ात

सिरे से खारिज़ कर बैठता हूँ, जब सुनता हूँ की चौरासी लाख [...]

मैं यूँ तो “भीष्म प्रतिज्ञ” नहीं !

मैं यूँ तो "भीष्म प्रतिज्ञ" नहीं, जो वचनों पर डटता आता .. हाँ [...]

कभी हार कर भी तुम्हे पा लिया..

कभी हार कर भी तुम्हे पा लिया, कभी जीत कर भी मुँह की खानी [...]

कपकपाती थरथराती ये सज़ा क्यों है?

कपकपाती थरथराती ये सज़ा क्यों है फिर भी ठंड का इतना मज़ा [...]

फिल्मों वाले अपराधी !

फुटपाथों पर सोने वाले, आज खून के आंसू रोते, समझ गये हैं [...]

माँ तुम एयरपोट न आना.. .

सेना से गर फ़ोन जो आये मैं ना बोलू और बताये पागल सी तू पता [...]

तुम लगी घाव पर मरहम सी..

मेरे सुख दुख से परिचित सी एक गूढ़ नियंता बन बैठी, तुम लगी घाव [...]

प्रेम का ‘सैक्सी’करण !

जिस दिन मुन्नी की बदनामी को हंस कर देश ने स्वीकारा था जिस दिन [...]

कहानी : अनसुलझी पहेली

"कल सुबह तुमसे मैट्रो पर मिलना है" किशन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं [...]

‘साहित्यपीडिया’ का कहर !

बदस्तूर जारी हैं साहित्यपीडिया का कहर, इस कदर की कल तक जो [...]

माँ तेरे एहसान !

तेरा बचपन में मुझे पुचकारना मेरी गलतियों पर फटकारना, माथे [...]

चुपके से निखरी रातों में. .

बिन बारिश के मौसम में, तेरा बरसना मुझे याद हैं उन दो कजरारी [...]

बिना मेरे अधूरी तुम..

मेरा हर सुर अधूरा हैं, अधूरी गीत की हर धुन, स्वप्न वो तुम नहीं [...]

हूँ रक्त मैं, तो भी विरक्त!

हूँ रक्त मैं, तो भी विरक्त! आखिर किस अकथ और अतृषित इच्छा के [...]

तुम्हारे जन्मदिन पर विशेष !

कभी कम ना हो सांसों की गिनतियाँ कभी कम ना हो जीवन के दिन कम, [...]

तेरा यूँ रूठ कर जाना ..

छतरपुर के झरोखों से, किसी की राह को तकना तेरे आने की चाहत में, [...]

तेरी यादों से कभी ना जाऊंगा मैं ..

माना की वो किस्से पुराने हुए, दूर तुझसे मिलने के बहाने हुए [...]

कपकपाते हैं हाथ मेरे..

कपकपाते हैं हाथ मेरे, जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में याद आते [...]

मैं बस एकबार..

मैं बस एकबार मिलना चाहता हूँ तुमसे , ओ मेरे दिलदार.. भुलाकर [...]

कागज़ के टुकड़े

बड़े लोग, अब नही घुसते हैं मेरी गलियों में बैठते नही है, ना ही [...]

चक्रव्यूह और मैं !

अब भी कुछ बिगड़ा नहीं हैं, इतना समय गुज़रा नहीं हैं पता नहीं की [...]

कृष्ण मैं भी नहीं, राधा तुम भी नहीं..

कृष्ण मैं भी नहीं, राधा तुम भी नहीं, प्रेम फिर भी इबादत से, कम [...]

अब मैं पुराने गांव को तरसता हूँ …

कटा जो पेड़ मेरे आँगन से उसकी छाँव को तरसता हूँ, अब मैं [...]

वक़्त की ताकत !

वक़्त ही सबको हँसाता, वक़्त ही सबको रुलाता वक़्त ही कुछ घाव [...]

किसान का दर्द

बदल गया है फ़ैशन सारा; बदल गया दुनिया का हाल, बदला नहीं किसान [...]

तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह…

तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह, की कोई मुझे आवाज़ ना दे, घुल जाउ [...]

ये जीवन भी क्या हैं?

ये जीवन भी क्या हैं, कभी उत्थान तो कभी पतन, कभी गूँज भरी [...]