साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan
Posts 57
Total Views 5,663
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

भगवान ‘को’ मानते हैं, भगवान ‘की’ नहीं।

अपने हिसाब से हम भगवान का चुनाव करते है। फिर वो हमारे हो जाते [...]

ये मथुरा की धरती हैं साहब !

ये मथुरा की धरती हैं साहब! जीवित हैं यहाँ कृष्ण की [...]

स्याह दीवारें !

अपनी धरती के क्षितिज से कही भी देखता हूँ, कीड़े-मकोड़े सी [...]

साम । दाम । दंड । भेद !

भाई, सांई?, कम, कसाई! स्व, क्रुद्ध, कंठ, रुद्ध! चिन्त, चम्भ, [...]

चोटीकटवा !

अफवाहों को अगर थोड़ा दरकिनार करूँ, तो पाता हूँ की चोटी हर [...]

समय लगेगा !

झुकेगा दम्भ, समय लगेगा, हटेगा बंद , समय लगेगा गिरूंगा आज, [...]

प्रतीत्यसमुत्पाद

आज ऐसा कोई भी इंसान नहीं, जिसको कोई दुःख ना हो। हर एक को कोई ना [...]

ना आँखों में मुझे सजाओं.. .

ना आँखों में मुझे सजाओं, मैं काजल सा ठहर जाऊंगा ना बातों में [...]

क्योंकि मरना तुम्हारी हद हैं!

आँखे फाड़ लक्ष्य को ताड़, जिद पर अड़ दुःखों से लड़, काटों पर [...]

‘उनसे’ ज्यादा भुखमरे!

मेरे देश की लोकतंत्रीय चक्की में तुम घुन से लगे हो, तुम्हारी [...]

लगा, गलत हूँ! 😢

पता चली जो गलत लिखाई, लगा गलत हूँ तुमने हटा आरी सी चलाई, लगा [...]

“मैं जो खाऊ तुम्हे क्या!” (मांसाहार पर दो टूक /- भाग 2)

कल जब मेट्रो से जा रहा था, तीन संभ्रांत परिवार की लड़कियों को [...]

तुम समझती क्यों नही माँ?

तुम्हारे एक आंसू की बूंद मेरेे दिल को चीर देती है, बढ़ा मेरी [...]

भैंस का दर्द! (एक गंभीर कविता)

धार्मिक अनुष्ठानों और तीक्ष्ण कानूनों से, गाय तो हो गयी हैं [...]

इंसान कबसे खाओगे? (मांसाहार पर दो टूक -भाग 1)

अपनी जीभ के स्वाद के लिए मूक और निरीह जानवरों को जो अपना [...]

‘विश्वास’ (लघुकथा)

बस भाई ...ज्यादा नही.... "अरे यार क्या बात कर रहा हैं.. एक पैग और [...]

छलक पड़ती हो तुम कभी.. .

छलक पड़ती हो तुम कभी , एक कशिश छोड़ जाती हो भिगाती बारिशें हैं [...]

कन्यादान

नही कर्ण भी समता रखता नही कर्ण का दान महान, सब दानों से बढ़कर [...]

समयातीत

जीवन की वेदी पर दुखाग्नि के हवन में समय की आहुतियाँ देता [...]

और तुम कहते हो कि तुम सुखी हो !

तुम केवल बाहर से हँसते हो, दिखावटी.. अंदर से बेहद खोखले हो [...]

जीवन का उद्देश्य क्या हैं?

‌इतनेदिनों से मैं सोच रहा था, चिंतन कर रहा था, औरों को सुन रहा [...]

वजह तुम हो तन्हाई की.. .

वजह तुम हो तन्हाई की, मेरा त्यौहार तुम ही हो, भले मैं पैर का [...]

मिलता नही कभी भी, जिंदगी में कुछ मुकम्मल..

मिलता नही कभी भी, जिंदगी में कुछ मुकम्मल, कभी पाते भी हो, तो [...]

निकृष्ट कवितायेँ !

व्यापक नही हैं संकुचित हैं अब, 'कविताओं का दायरा' यहाँ अब भी [...]

कटुसत्य

चमक भी पैसा दमक भी पैसा आटा भी पैसा नमक भी पैसा नाम भी [...]

प्रेम की परिभाषा

प्रेम नहीं शादी का बंधन प्रेम नहीं रस्मों की अड़चन, प्रेम [...]

दोस्ती में कचरा !

वो कोन था? राजेश ने सहमकर पूछा। "वो..वो दोस्त है।" "क्या सच में [...]

गरीब का ए. टी. एम्.

मेरे देश का गरीब, वह ए. टी. एम्. है जिसमे लगता है जब भी शासन की [...]

माँ और बाप

आस्थाओं की आस्था प्रेम की पराकाष्ठा निज का दफ़न ताप, माँ और [...]

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ..

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ढलते उजालों का जैसे, [...]