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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

क्यों मेघ ये बरसते हैं।

बादल देखो मेघ घन,जलधर,वारिद, की आंखों से क्यों आंसू [...]

प्रेम

प्रेम विद्या- छंद मुक्त तेरे हृदय प्रेम का प्याला, अब तक [...]

कारवां जिंदगी का।

कुछ इस तरह बढ़ता रहा कारवां जिंदगी का, न तुमने याद किया और न [...]

मिल गई।

फ़िलबदीह - २४९ मिसरा - जिसे मां की दुआएं मिल गई। काफ़िया [...]

हिसाब मांगे हैं।

फ़िलबदीह-१२२ मिसरा- तिरी निगाह तो सारा हिसाब मांगे [...]

खनक

खनके वलय,कंगना खनखन, प्रिये तू चंचल सुंदर चपल। सुनकर खनक [...]

सफलता तेरे लिए।

फ़िया- आया।(आ) २४/५/१७ मत गुरुर कर सफलता खुद पे, मैं हासिल [...]

सिंधु का इंटरव्यू

सागर किनारे समुद रसागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि, [...]

शब्द

छंद मुक्त रचना विषय-शब्द शब्द असीम भाव हैं, नहीं हैं माना [...]

गज़ल

फ़िलबदीह-१२१ २३/५/१७ मिसरा-न जाने वजह क्या हुई खुद खुशी [...]

किस लिए।

काफ़िया- जला(आ) रदीफ-लिए। माना अल्लाह की है तू बेनज़ीर अदा [...]

जिंदगी

बहृ-२१२ २१२ २१२ तुम गये जिंदगी थम गयी, ढूंढते ही रहे [...]

मन और जीवन

मन और जीवन है मन चंचल-जीवन गतिवान, दोनों​ही परस्पर चलते [...]

– दिल वही खामोशियां बोता रहा।

- दिल वही खामोशियां बोता रहा। गिरह- रात थी गहरी बहुत,मोम सा [...]

उसके लिए।

रद़ीफ-उसके लिए। हैं सारे के सारे रहमों करम सिर्फ उसके [...]

चांद

चांद १) शरद की श्वेत रात्रि में इक दिन उदास था मेरा [...]

नयन तेरे

नयन तेरे..... लोचन,नयन,नेत्र,चक्षु हैं , अति मनमोहक और [...]

संस्मरण

अलौकिक संस्मरण......। मीठी सी यादों का मैं लाई हूं आवरण [...]

खिलौनों का सफ़र

खिलौनों का सफ़र ज़ीस्त यह है बस खिलौनों का सफ़र, कोई सस्ता, [...]

सिंदूरी शाम

सिंदूरी शाम थककर है आया देख सूरज सांझ की बांहों में, शर्म [...]

गज़ल

फ़िलबदीह -११९ तारिख़-२१/५/१७ मिसरा-इल्म उसका घटा नहीं [...]

सीप और मोती

सीप और मोती मेरा दिल बंद सीप है और सनम तू उसमें है मोती तेरा [...]

मिसरा-जिंदगी खुशनुमा रंग भरने लगी।

गज़ल मिसरा-जिंदगी खुशनुमा रंग भरने लगी। हर इक सूरत में [...]

मुक्तक

इंतजार बस तेरा ख़याल तेरा इंतजार करते हैं खुशी तेरी चाहत [...]

सुन ए खुशी,

सुन ए खुशी, बातें दिल की जों तेरे लबों पे आजाएं !! तो मेरा इश्क [...]

अहसास

अनोखा अहसास सुन मेरी भी एक बार ए मेरे विचलित चंचल मन कर तू [...]

मेरी मां

माँ (1) जननी, माँ, प्रसू,धात्री,वत्सला,सुदर्शना [...]

बंद पन्नों का सफर

अब भी महकता है बंद पन्नों में वह सूखा गुलाब.......। अब भी तेरी [...]

मुक्तक

मुक्तक हरित पल्लवित अचला वसुधा सुंदर अति मनोहर क्यों किया [...]

किन्नर ……माँ के नाम एक पाती , जो लिखी है रह जाती

माँ के नाम एक पाती , जो लिखी है रह जाती किन्नर ...... कहते हैं [...]