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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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विधाएं

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कविता (51 Posts)


कल्पना

अकल्पनीय स्वर्णिम कल्पना मेरे इंद्रधनुषी रंगें ख्वाब [...]

आया करो

हे मुरलीमनोहर, केशव,गिरीधर ऐसे न हमको सताया करो। लुका छिपी [...]

बाज़ार

बाज़ार प्रीत रही नहीँ शेष यहां पर कामुक हुआ श्रृंगार, बात [...]

कविता

वाह री कुदरत क्या खूब रची मानव की सुसंरचना कुशाग्र बुद्धि और [...]

फूलों की बगिया

मदहोश दिवाना हुआ भंवर,अलि मधुकर है बवराया देख कोंपले​ बगिया [...]

आवाज़ का आगाज़

घोष,ध्वनि,नाद,बन धड़कन, गूँजती साँसों में मधुर तेरी याद [...]

लम्हें

लम्हे पल घड़ी बहुत ढूंढा बहुत खोजा रूठे लम्हों को जो रेत की [...]

झूले

देख प्रिय झमाझम मेघ बरसते,सावन के झूले पड़े हैं। छम छमाछम [...]

मन मयूर

देखो नाचता मन मयूरा, हैं पंख छितराये, मेरा पंख फैलाने को जी [...]

जीवन

जीवन की कहानी पाँच तत्त्वों​ में सीमित हमारी जिंदगानी [...]

आ जाओ

अब आओ आ भी जाओ,हे कान्हा कृष्ण मुरारी पथराई राह तकती, अंखियां [...]

नारी

नारी तेरे कई रूप तू वसुधा तुझमें समाए सब स्वरूप चंचल तन है और [...]

विश्वास

विश्वास, भरोसा, निष्ठा, यकीं और ऐतबार लगी है सेल इनकी,बिक रहे [...]

इंतजार

इंतजार सहर होने का था पर रात बसर हो गयी वो आया ना जालिम शब -ए - [...]

अश्रु बदरी

अश्रु बदरी हूँ दुःख से भरी अश्रु बदरी मैं बरसूँ या खामोश [...]

याद

याद ...... ये नहीं सोचा था कभी कि याद आएँगे इतने, आप जाने के बाद [...]

सुकून

उड़ गया जो तेरे गम में ,वो दिन-रात का सुकून है जो छाया है रहता [...]

नारी

नारी तेरे कई रूप तू वसुधा तुझमें समाए सब स्वरूप चंचल तन है [...]

जीवन की कहानी

जीवन की कहानी पाँच तत्त्वों​ में सीमित हमारी जिंदगानी [...]

आइना हूं मैं तेरा…….

आईना सुन, मेरी जाने वफ़ा,आइना हूं मै तेरा। क्यों तू मुझसे है [...]

देखा है

तपती रातों में हमने मौसम को सर्द देखा है। तुम्हारे दर्द में [...]

गुज़रा ज़माना

विद्यालय की यादें....... सौंधी मिट्टी की भीनी भीनी खुशबू सी [...]

आंसू

आंसू हृदय की घनीभूत पीड़ा का, अद्भुत अहसास हैं आंसू। बीती [...]

दोस्ती और प्यार

दोस्ती और प्यार है दोनों में गूढता अपार...... न बदलें हैं न [...]

आसमां

देखो आज मां के आंचल सा मुझपे छाया है आसमां....... रोज मैं गिनता [...]

मुस्कान

मुस्कुराहट तेरे होठों पर खिलती जो,मेरे चेहरे की वो रौनक [...]

श्रृंगार

श्रृंगार हिंदी भाव भूमि कर रही,नित काव्य सृजन [...]

समंदर

समंदर क्या कभी तुमने समंदर में शहर देखा है? क्या कभी तुमने [...]

महफ़िल

आज का हासिल- महफ़िल रोज सजती है महफ़िल वर्णों की "काव्य [...]

मां

हाँ बहुत करती हूँ प्रयास कर नयन बन्द ईश्वर वंदन को न जाने [...]