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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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विधाएं

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गीत (40 Posts)


बारिश

बारिश उमड़ उमड़ रहे घुमड़ घुमड़, घन बरसाने को वर्षा घरड़ [...]

शांत रस

हर बार तुम शांत चित्त से मेरी पीड़ा हर लेते हो। कैसे हृदय [...]

शिव

श्रावण झडी़ लग गई, घटा घनी घनघोर। भांग धतूरा घुट रहा, चढ़ा [...]

न जाने क्या क्या कहता दिल

सुन, किया करता है आजकल , खुद से ही अनगिनत वादे, न जाने क्या [...]

चांद का झूला

आओ तुम्हें चाँद पर झूला दूँ, धवल बादल का बिस्तर बिछा दूँ। आओ [...]

अल्फ़ाज़

मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात का अर्थ मालूम है मुझे मैं एहसास [...]

आस

फ़कत एक आस ही तो है लगाये कब से बैठे है बडा नाजुक है दिल मेरा [...]

आ जाओ

अब आओ आ भी जाओ,हे कान्हा कृष्ण मुरारी पथराई राह तकती, अंखियां [...]

चाहता है।

देखो नाचता मन मयूरा, हैं पंख छितराये, मेरा पंख फैलाने को जी [...]

आहट

हैं प्रेम राग की ये आहट, खिलती होठों पर मुस्कराहट। पी के [...]

बादल

☁⛅🌈बादल🌈 ⛅☁ ☔☔⚡⚡☔☔ कभी श्यामल कभी धवल से बादल, खिलते [...]

एक दिन।

एक दिन..... सुन, मेरे कान्हा की तुझपे इनायत हो ही जाएगी एक [...]

भोला बचपन

सुनो, क्या आपने पहचाना मुझे? अरे भाई! मैं हूं भोला-मस्तमोला [...]

दीप

स्वरचित आ दीप जला तू खुशियो का ......... आ दीप जला तू खुशियों का [...]

दर्द

दर्द...... सादर प्रेषित। काव्य की किसी भी विद्या में कह पाना [...]

प्रेम गीत

प्रेम हे प्रेम,तू सप्तसुरी सरगम का राग है, हर प्रेमी के जीवन [...]

अदा

आज का हासिल- अदा कहां से शुरू करूं कान्हा और कहां खत्म [...]

अक्स

परछाई.....। स्नेहिल हो सजल नयनों से है कोटि-कोटि आभार [...]

गीत

आरे आरे। सुन, कहीं मत जाइयो दिलबर, मेरा दिल पुकारे आरे [...]

अधूरी आस

अधूरी आस......। सुनो, है सब कुछ पास मेरे फिर भी कुछ नहीं है पास [...]

चांदनी रात है।

आज चांदनी रात है, पिया भी साथ हैं। इठला रही रजनी मन में सहेजे [...]

सीख लिया है।

ज़ख्मों पर पैमंद। सुनो, आजकल मैंने ज़ख्मों का मेकप करना [...]

वियोग

वियोग। इसका मिलन ही इलाज है, है ये लाइलाज, दिल का रोग। हैं [...]

प्रकृति से संवाद।

प्रकृति से संवाद......। वाह! अद्भुत! अप्रतीम ! अतीव सुंदर है [...]

सनम

वल्गा- सनम कहूं खुदा की इनायत या तक़दीर का करम हुआ। ले तेरी [...]

ख़फा ख़फा।

रद़ीफ- ख़फा ख़फा। हवाएं भी ख़फा ख़फा फिजाएं भी​ख़फा [...]

रिश्ते

रिश्ते कुछ हैं ख़ून के तो कुछ खुद ही बनाए रिश्ते। बात ख़ास [...]

चाहत

कभी बेरंग गुज़री है कभी बेज़ार गुज़री है तेरी ही चाहतों के [...]

तेरे लिए

तेरे लिए। आ नव बसंत खिलादूं, मैं सजनी तेरे लिए। खुशियां [...]

अहसास लिखूं।

अहसास सोच ​रही हूं आज पिया मैं तुम पर एक उपन्यास [...]