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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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गज़ल/गीतिका (37 Posts)


गज़ल

इतना प्यार भरा हृदय में,तू ही बता मैं तोलूं कैसे खामोश दर्पण [...]

गज़ल

बहुत दिनों बाद, आप सभी को सादर प्रणाम एवं सादर प्रेषित एक [...]

इनायत

इनायत,अनुग्रह,सच्ची कृपा, उपकार,दया,मेहरबानी हैं बहुत [...]

एहसास

ये जो एहसास है अद्भुत अद्वितीय और ख़ास है। जश्न है,महफिल [...]

छोड़ जाऊंगा।

ये न सोचा था कि राहे ज़िन्दगी में,ऐसे भी मोड़ पाऊंगा, फकत [...]

गज़ल

तेरी रुसवाई का अंधेरा लिए, दिल मेरा दिया सा रात भर जलता रहा [...]

मत जाना

सादर प्रेषित स्वरचित मिले हमदम हम मुश्किल से, कि मुख तुम [...]

उम्र भर

उम्र भर तेरी धड़कन सुन मैं बोल उठी, तेरी सांसों पर मैं डोल [...]

रदीफ़-रह गया

रदीफ़- रह गया। जाने कहां गए वो लम्हे इक जर्जर किला था ढह [...]

गज़ल

करने रजनी को धवल शीतल, रात भर तारे नभ में हैं चमकते । विरह [...]

गज़ल

है पुर्वा झूमती मदमाती ज्यूं बर्खा के संग, हां दो दिलों को [...]

गज़ल

रदीफ- रख लूँ । तेरे जिगर में आ अपने ,सब अरमान रख लूँ । ओ सजना [...]

हुए है

रदीफ- हुए हैं। प्रीति में सनम हम तुम्हारी, आँसुओं में नहाए [...]

गज़ल

हम ख्वाबों की कश्ती बिन जल ही डुबोते अगर तुम न होते,अगर तुम न [...]

गज़ल

मिसरा­-हम उसे देवता बना [...]

गज़ल

संगदिल है बहुत माशूक मेरा न जाने दिल क्यों उसपे आया है टूटा [...]

अब भी है।

रदीफ- अब भी है। कलम मेरी,उनके अशआर अब भी हैं। दूर हैं, मगर [...]

मज़ा आ गया।

गिरह- हंसके जीने का सीखा नया इक सबक, ग़म जहां से छिपाया, [...]

गज़ल

चराग मैं बनके चराग-ए-चमन जलती ही रही महबूब बड़ी शिद्धतों से [...]

लगा है।

फिलबदीह -१३५ मिसरा- मरेंगे बिन तेरे लगने लगा है। काफिया- [...]

लगी हैं।

उन्वान- जब से खामोशियां मुस्कुराने लगी हैं। जिंदगी भी मधुर [...]

देखते हैं।

रद़ीफ- देखते हैं। चुरा के वो हमको, नज़र देखते हैं। वो घड़ी दो [...]

नहीं जाता।

कुछ रिश्ते साथ होकर भी,याद नहीं आते कुछ दूर हो फिर भी, भुलाया [...]

नहीं मिले।

रद़ीफ़- नहीं मिले। क्यों इक हसीं ख्वाब सी है, किताब [...]

जब शब्द बनते हैं तेरी यादों के रंगी तितलियां।

तेरी यादों के कुछ रंगीं लम्हे होकर के शब्द भी उड़े बनकर [...]

गज़ल

मिसरा- मेरी चाहत के सांचे में पिघल जा। काफ़िया-पिघल [...]

गज़ल

मिसरा- जब बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूं करें [...]

गज़ल

मिसरा-आप मेरी जिंदगी बन जाइए। सुनकर मेरी बात मंद मंद न [...]

गज़ल

२५/५/१८ मिसरा- हमसे ऊंची उड़ान किसकी है। क़ाफ़िया- किसकी ( [...]

गज़ल

आज का हासिल मिसरा- तुम हकीकत नहीं हो हसरत [...]