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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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गज़ल/गीतिका (29 Posts)


रदीफ़-रह गया

रदीफ़- रह गया। जाने कहां गए वो लम्हे इक जर्जर किला था ढह [...]

गज़ल

करने रजनी को धवल शीतल, रात भर तारे नभ में हैं चमकते । विरह [...]

गज़ल

है पुर्वा झूमती मदमाती ज्यूं बर्खा के संग, हां दो दिलों को [...]

गज़ल

रदीफ- रख लूँ । तेरे जिगर में आ अपने ,सब अरमान रख लूँ । ओ सजना [...]

हुए है

रदीफ- हुए हैं। प्रीति में सनम हम तुम्हारी, आँसुओं में नहाए [...]

गज़ल

हम ख्वाबों की कश्ती बिन जल ही डुबोते अगर तुम न होते,अगर तुम न [...]

गज़ल

मिसरा­-हम उसे देवता बना [...]

गज़ल

संगदिल है बहुत माशूक मेरा न जाने दिल क्यों उसपे आया है टूटा [...]

अब भी है।

रदीफ- अब भी है। कलम मेरी,उनके अशआर अब भी हैं। दूर हैं, मगर [...]

मज़ा आ गया।

गिरह- हंसके जीने का सीखा नया इक सबक, ग़म जहां से छिपाया, [...]

गज़ल

चराग मैं बनके चराग-ए-चमन जलती ही रही महबूब बड़ी शिद्धतों से [...]

लगा है।

फिलबदीह -१३५ मिसरा- मरेंगे बिन तेरे लगने लगा है। काफिया- [...]

लगी हैं।

उन्वान- जब से खामोशियां मुस्कुराने लगी हैं। जिंदगी भी मधुर [...]

देखते हैं।

रद़ीफ- देखते हैं। चुरा के वो हमको, नज़र देखते हैं। वो घड़ी दो [...]

नहीं जाता।

कुछ रिश्ते साथ होकर भी,याद नहीं आते कुछ दूर हो फिर भी, भुलाया [...]

नहीं मिले।

रद़ीफ़- नहीं मिले। क्यों इक हसीं ख्वाब सी है, किताब [...]

जब शब्द बनते हैं तेरी यादों के रंगी तितलियां।

तेरी यादों के कुछ रंगीं लम्हे होकर के शब्द भी उड़े बनकर [...]

गज़ल

मिसरा- मेरी चाहत के सांचे में पिघल जा। काफ़िया-पिघल [...]

गज़ल

मिसरा- जब बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूं करें [...]

गज़ल

मिसरा-आप मेरी जिंदगी बन जाइए। सुनकर मेरी बात मंद मंद न [...]

गज़ल

२५/५/१८ मिसरा- हमसे ऊंची उड़ान किसकी है। क़ाफ़िया- किसकी ( [...]

गज़ल

आज का हासिल मिसरा- तुम हकीकत नहीं हो हसरत [...]

हिसाब मांगे हैं।

फ़िलबदीह-१२२ मिसरा- तिरी निगाह तो सारा हिसाब मांगे [...]

गज़ल

फ़िलबदीह-१२१ २३/५/१७ मिसरा-न जाने वजह क्या हुई खुद खुशी [...]

किस लिए।

काफ़िया- जला(आ) रदीफ-लिए। माना अल्लाह की है तू बेनज़ीर अदा [...]

जिंदगी

बहृ-२१२ २१२ २१२ तुम गये जिंदगी थम गयी, ढूंढते ही रहे [...]

उसके लिए।

रद़ीफ-उसके लिए। हैं सारे के सारे रहमों करम सिर्फ उसके [...]

गज़ल

फ़िलबदीह -११९ तारिख़-२१/५/१७ मिसरा-इल्म उसका घटा नहीं [...]

मिसरा-जिंदगी खुशनुमा रंग भरने लगी।

गज़ल मिसरा-जिंदगी खुशनुमा रंग भरने लगी। हर इक सूरत में [...]