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Author: Neelam Sharma

Neelam Sharma
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विधाएं

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बादल

☁⛅🌈बादल🌈 ⛅☁ ☔☔⚡⚡☔☔ कभी श्यामल कभी धवल से बादल, खिलते [...]

आइना हूं मैं तेरा…….

आईना सुन, मेरी जाने वफ़ा,आइना हूं मै तेरा। क्यों तू मुझसे है [...]

देखा है

तपती रातों में हमने मौसम को सर्द देखा है। तुम्हारे दर्द में [...]

एक दिन।

एक दिन..... सुन, मेरे कान्हा की तुझपे इनायत हो ही जाएगी एक [...]

फासले

हाइकु- फासला फासले दूरी निभाते मजबूरी बस नाम की। कोशिश भी [...]

गुज़रा ज़माना

विद्यालय की यादें....... सौंधी मिट्टी की भीनी भीनी खुशबू सी [...]

आंसू

आंसू हृदय की घनीभूत पीड़ा का, अद्भुत अहसास हैं आंसू। बीती [...]

दोस्ती और प्यार

दोस्ती और प्यार है दोनों में गूढता अपार...... न बदलें हैं न [...]

मुक्तक

सादर प्रेषित सारस मुक्तक वल्गा- प्यार संजीवन प्रसाद है, [...]

आसमां

देखो आज मां के आंचल सा मुझपे छाया है आसमां....... रोज मैं गिनता [...]

मुस्कान

मुस्कुराहट तेरे होठों पर खिलती जो,मेरे चेहरे की वो रौनक [...]

भोला बचपन

सुनो, क्या आपने पहचाना मुझे? अरे भाई! मैं हूं भोला-मस्तमोला [...]

लघुकथा

प्रदूषण अमित- हाय, नितिन क्या तुमने सभी विषयों का गृह कार्य [...]

मेहंदी

मेहंदी मुक्तक मेहंदी प्रतीक प्रीत का, प्रियतम की सौगात [...]

श्रृंगार

श्रृंगार हिंदी भाव भूमि कर रही,नित काव्य सृजन [...]

सरसी मुक्तक

सरसी मुक्तक मात्रा भार-१६-११ शशि से लेकर के तुम चांदी, दिनकर [...]

दीप

स्वरचित आ दीप जला तू खुशियो का ......... आ दीप जला तू खुशियों का [...]

मुक्तक

कुछ और नहीं हिय कान्हा के,प्रतीबिंबित है अनुराग अनंत जल भर [...]

अब भी है।

रदीफ- अब भी है। कलम मेरी,उनके अशआर अब भी हैं। दूर हैं, मगर [...]

मुक्तक

सादर प्रेषित जय किसान और जवान का नारा अब बेमानी है। रक्षक [...]

संत

वल्गा- संत विद्या-दोहा मुक्तक संत संत अब हैं नहीं,सतपथ दीना [...]

मज़ा आ गया।

गिरह- हंसके जीने का सीखा नया इक सबक, ग़म जहां से छिपाया, [...]

समंदर

समंदर क्या कभी तुमने समंदर में शहर देखा है? क्या कभी तुमने [...]

मुक्तक

मुक्तक अनुराग मृदुल मन की लता हिलती है, अनुराग उसमें [...]

दर्द

दर्द...... सादर प्रेषित। काव्य की किसी भी विद्या में कह पाना [...]

मुक्तक

हूं चंचल चपल नदि मैं,बहूं या न बहूं? उर दर्द है वेदना है सहूं [...]

उल्लाला छंद

उल्लाला छंद मृगनयनी है राधिका,मोहन चंचल मन अधीर। लाज हया सब [...]

महफ़िल

आज का हासिल- महफ़िल रोज सजती है महफ़िल वर्णों की "काव्य [...]

गज़ल

चराग मैं बनके चराग-ए-चमन जलती ही रही महबूब बड़ी शिद्धतों से [...]

मां

हाँ बहुत करती हूँ प्रयास कर नयन बन्द ईश्वर वंदन को न जाने [...]