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Author: MridulC Srivastava

MridulC Srivastava
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हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं

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काव्य चर्चा

मेरी पंक्तियाँ 👇👇 ● तारीफ नहीं करता,इसे तारीफ न मसझ लेना, यह [...]

विश्वास

दूर के ढोल सुहाने होते हैं, विश्वास के बड़े मायने होते [...]

झूठे आदर्श

झूठे आदर्शों की 3D तस्वीर, गढ़ सकते हैं सनम हम भी बहुत से ताबीर, [...]

आदर्शो की कीमत

अच्छे लोगों की सांसें कम ही होती हैं उम्मीद उन्हीं की टूटती [...]

किसी ने बुरा जाना किसी ने भला जाना

किसी ने बुरा जाना किसी ने भला जाना, मैं जो खुद को जान न सका [...]

तेरा साथ छूटा

तेरा साथ छूटा,सम्हलने में वक्त लगा, अब फिर उसी मौसम,उसी प्रेम [...]

खामोश शहर

खामोश शहर में गूँजती एक आवाज कम नहीं, अंधेरे में जले,वह एक [...]

व्यक्ति नही राष्ट्र महान

किसी से नही द्वेष मेरो,नही किसी से प्रीत, मातृ भूमि की जय [...]

जन कवि हूँ

जनता मुझसे पूछ रही मैं क्या बतलाऊ, जनकवि हुँ साफ कहूंगा मैं [...]

हक

हक के दमन का तो इतिहास रहा है, कोई जयचन्द तो कोई भक्त रहा [...]

जनकवि हूँ

जनता मुझसे पूछ रही मैं क्या बतलाऊ, जनकवि हुँ साफ कहूंगा मैं [...]

थक गया हूँ

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं, विपदा में मिट जाऊ राह छोड़ हट [...]

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं, विपदा में मिट जाऊं,राह छोड़ हट [...]

असाधरण सूझ बूझ और मेजर गोगोई

भारतीय सेना की पहचान विश्व के कुछ गिने चुने शक्तिशाली देशों [...]

प्रकृति,हम और वन्य जीव

प्रकृति की मनोरम कला अद्भुत,अद्वितीय,अकल्पनीय है, सुबह के [...]

सत्यमेव जयते

2 और जवान शहीद शव के साथ पाक ने की बर्बरता.. मस्तक पर विराजमान [...]

माँ भारती,तोड़ती पथ्थर

मातृभूमि से बढ़ कर नहीं कोई उपलब्धि तेरी, सत्य विजय से पहले [...]

बड़े काम की बेटियां

ख़ामोशी तेरी,पहल भी तेरा, नाकामी तेरी,शहर भी तेरा, गूंजती [...]

बड़े काम की बेटियां

ख़ामोशी तेरी,पहल भी तेरा, नाकामी तेरी,शहर भी तेरा, गूंजती [...]

निर्भया

तारीफ़ क्या करूँ, क्या कहूँ मैं निर्भया, मन पर बोझ,माथे पर [...]

निर्भया

तारीफ़ क्या करूँ, क्या कहूँ मैं तुम्हे निर्भया, मन पर बोझ,माथे [...]

हास्य व्यंग्य

राहुल बाबा😜 मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है,मैं बोलूंगा तो [...]

नारी

आन मान और मर्यादा,सिर्फ तुमपर ही लादा जाता, मछली को तैरना कौन [...]

सच

अंधे को बंदूख दें कर,सीमा पर शत्रु से मुकाबले के लिए भेजना [...]

नोटबन्दी

बिना किसी बैकप के,इक्के के पीछे घोड़े को बान्ध कर दौड़ाने वाले [...]

भक्ति

अधिकार,संघर्ष,तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्थम किया है,तो कोई [...]

जुल्म_ए_भक्ति

अधिकार,संघर्ष,तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्थम किया है,तो कोई [...]

संघर्ष एक इतिहास

जुल्म_ए_खाकी या जुल्म_ए_खादी अधिकार के संघर्ष का तो इतिहास [...]

सम्मान/तिरस्कार और समाज

तारीफ की जो बात की और जमाने से तुलना, तो सुनो हे मित्र, क्या [...]

सिद्धान्तों की कीमत पर जीना मंजूर नही मुझे

समझौतों में स्वार्थ और लाचारी की बू आती है, आत्म-सम्मान [...]