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Author: Mahesh Kumar Kuldeep "Mahi"

Mahesh Kumar Kuldeep
Posts 15
Total Views 416
प्रकाशन साहित्यिक गतिविधियाँ एवं सम्मान – अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं में आपकी गज़ल, कवितायें आदि का प्रकाशन | प्रकाशित साहित्य - गुलदस्त ए ग़ज़ल (साझा काव्य-संग्रह), काव्य सुगंध भाग-3(साझा काव्य-संग्रह),कलाम को सलाम (साझा काव्य-संग्रह), प्रेम काव्य सागर (साझा काव्य-संग्रह), अनुकृति प्रकाशन, बरेली त्रैमासिक पत्रिका ‘अनुगुंजन’में सतत प्रकाशन |पहला गजल-संग्रह ‘कागज़ पर जिंदगी’ प्रकाशाधीन |

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

हाले-दिल गैरों से खुलकर के बताया न गया

हाले-दिल गैरों से खुलकर के बताया न गया ज़ख़्म ऐसा था किसी तरह् [...]

राहो-मंज़िल सभी की जुदा देखिये

राहो-मंज़िल सभी की जुदा देखिये आदमी आदमी से ख़फ़ा [...]

आइना खुद को दिखाना आ गया

आइना खुद को दिखाना आ गया राब्ता सच से निभाना आ गया जब से हम [...]

अक़ीदत झूठ की करता नहीं मैं

अक़ीदत झूठ की करता नहीं मैं बदी के रास्ते चलता नहीं मैं मुझे [...]

शब्दों और भावों का रण

हृदय का अभिमान ढूंढ़ता अधरों का जलपान ढूंढ़ता शब्दों और भावों [...]

ज़िन्दगी हमको बिताना आ गया

ज़िन्दगी हमको बिताना आ गया रोते रोते मुस्कुराना आ गया ज़ख्म [...]

तिश्नगी दिल की वो बढ़ाते हैं

तिश्नगी दिल की वो बढ़ाते हैं दुश्मनी हमसे ज्यों निभाते [...]

किसी का टूट जाये दिल कभी वो बात मत कहिये

किसी का टूट जाये दिल कभी वो बात मत कहिये मुहब्बत पाक बंधन है [...]

न फैला हाथ तू अपना ज़रा सम्मान पैदा कर

न फैला हाथ तू अपना ज़रा सम्मान पैदा कर हमेशा सर उठा के जीने का [...]

बेवफ़ा है ज़िन्दगी और मौत पर इल्ज़ाम है

बेवफ़ा है ज़िन्दगी और मौत पर इल्ज़ाम है मौत तो इस ज़िन्दगी का [...]

अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये

अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये तुम्हे पाकर के हम सबसे [...]

वो मेरी हस्ती मिटाने को चला

वो मेरी हस्ती मिटाने को चला फूंक से पर्वत उड़ाने को चला यूँ [...]

कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को

कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को ज़रूरत आपकी है आशिकी को मिटाकर [...]

भुलाता जा रहा है सादगी को

भुलाता जा रहा है सादगी को ये क्या होने लगा है आदमी को जिधर [...]

हमें कब तलक आजमाते रहोगे

हमें कब तलक आजमाते रहोगे गिराते रहोगे उठाते रहोगे बचाओगे [...]