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Author: MITHILESH RAI

MITHILESH RAI
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुक्तक

तेरी आरजू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ! तेरी तमन्नाओं को छोड़ [...]

मुक्तक

तेरी यादों की जब भी आहट होती है! दिल में जैसे कोई घबराहट होती [...]

मुक्तक

जो आती है लबों पर बात तुम वही तो हो! जो तड़पाती है मुलाकात तुम [...]

मुक्तक

तुमसे मुलाकात कभी जो हो जाती है! जैसे दिल में अंगड़ाई रो जाती [...]

मुक्तक

तेरे बगैर तन्हा जमाने में रह गया हूँ! तेरी यादों के आशियाने [...]

मुक्तक

आरजू तेरी बुला रही है मुझे! याद भी तुमसे मिला रही है [...]

मुक्तक

आओ फिर से एक बार नादानी हम करें! नजरों में तिश्नगी की रवानी हम [...]

मुक्तक

मुझको तेरी याद अभी फिर आयी है! चाहत की फरियाद अभी फिर आयी [...]

मुक्तक

तुम देखकर भी मुझको ठहरते नहीं हो! तुम सामने मेरे कभी रहते [...]

मुक्तक

तेरे लिए हम तन्हा होते चले गये! तेरे लिए हम खुद को खोते चले [...]

मुक्तक

तेरा नाम कागज पर बार-बार लिखता हूँ! तेरे प्यार को दिल में [...]

मुक्तक

ख्वाबों की हकीकतें रिश्ते तोड़ देती हैं! रिश्तों की जरूरतें [...]

मुक्तक

हर शाम मुझे तेरी कमी महसूस होती है! अपनी हर धड़कन में नमी [...]

मुक्तक

दिन गुजर जाएगा मगर रात जब होगी! तेरी चाहत से मुलाकात तब [...]

मुक्तक

तेरे ख्यालों की मैं राह ढूंढ लेता हूँ! तेरे जख्मों की मैं आह [...]

मुक्तक

वक्त जाता है मगर खामोशी नहीं जाती! तेरे हुस्न की कभी मदहोशी [...]

मुक्तक

तेरे दीदार का बहाना मिल ही जाता है! तेरी उल्फ़त का तराना मिल [...]

मुक्तक

मैं इत्तेफाक से गुनाह कर बैठा हूँ! तेरे रुखसार पर निगाह कर [...]

मुक्तक

मेरा जिस्म है मगर जान तुम्हारी है! तेरे बिना तन्हा जिन्दगी [...]

मुक्तक

तेरा ख्याल मेरी हद से गुज़र रहा है! मेरा जिस्म तेरी चाहत से डर [...]

मुक्तक

तुमसे बार बार मैं बात करना चाहता हूँ! तेरी जुल्फ के तले रात [...]

मुक्तक

तेरा जो दीवाना था कब का मर गया है! तेरा जो परवाना था कब का डर [...]

मुक्तक

तेरा जिक्र दर्द का बहाना बन जाता है! मेरी बेखुदी का अफसाना बन [...]

मुक्तक

कोई खौफ़ नहीं है मरने से मुझको! दामन में अश्कों के बिखरने से [...]

मुक्तक

अपनी तमन्नाओं पर मैं नकाब रखता हूँ! धड़कनों में यादों की मैं [...]

मुक्तक

जिन्दगी मिलती नहीं किसी को सस्ती बनकर! कोई तन्हा है कहीं कोई [...]

मुक्तक

कभी वक्त से हारा हूँ कभी हालात से! कभी दर्द से हारा हूँ कभी [...]

मुक्तक

तुमको एक मुद्दत से अपना बना बैठा हूँ! अपनी उम्मीदों का सपना [...]

मुक्तक

अपनी तन्हाई को कबतक सहूँ मैं? अपनी बेचैनी को किससे कहूँ [...]

मुक्तक

जब वादों की जश्ने-रात होती है! ख्वाबों की नजरों से बात होती [...]