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Author: MITHILESH RAI

MITHILESH RAI
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुक्तक

क्यों तेरी तमन्नाओं से मैं छिपता रहता हूँ? क्यों अपनी बेबसी [...]

मुक्तक

आज फिर मौसम में नमी सी आ रही है! जिन्दगी में तेरी कमी सी आ रही [...]

मुक्तक

मुझसे खता हुई है तुमसे दिल लगाने की! तुम भी भूल गये हो राहें [...]

मुक्तक

जी रहा हूँ मैं तो अश्कों को पीते-पीते! जी रहा हूँ मैं तो [...]

मुक्तक

राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो! तन्हा रास्तों पर तुम चलते [...]

मुक्तक

तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है! तेरी याद आज भी मुझको सताती [...]

मुक्तक

हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है! दर्द और तन्हाई की शाम जैसा [...]

मुक्तक

तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई? तेरा दर्द न आए तो फिर बात [...]

मुक्तक

टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत! जिन्दगी में गम के बहाने हैं [...]

मुक्तक

फसाना जिंदगी का अजीब सा होता है! हर ख्वाब आदमी का रकीब सा होता [...]

मुक्तक

तेरे सिवा कुछ भी नजर आता नहीं है! ख्वाबों का सफर भी [...]

मुक्तक

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों [...]

मुक्तक

तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे? तेरी चाहत में खुद को बरबाद [...]

मुक्तक

तुम राह अपनी बदलकर देख लो कभी! तुम चाह अपनी बदलकर देख लो [...]

मुक्तक

मेरी जिन्दगी गमें-ख्याल बन गयी है! तन्हा बेखुदी की मिसाल बन [...]

मुक्तक

तुम मेरी यादों में आते किसलिए हो? तुम मेरे दर्द को बुलाते [...]

मुक्तक

जख्म मिट गया है मगर मौजूद तेरी निशानी है! गुजरे हुए हालात की [...]

मुक्तक

जख्म मिट गया है मगर मौजूद तेरी निशानी है! गुजरे हुए हालात की [...]

मुक्तक

दर्द तेरा कायम है याद भी आ जाती है! #शाम_ए_तन्हाई में [...]

मुक्तक

जब भी ख्यालों में यादों की लहर आती है! #दर्द की बेचैनी में रात [...]

मुक्तक

मेरा ख्याल तेरी यादों से डर जाता है! मेरे दर्द को दिल में गहरा [...]

मुक्तक

तुम मेरी चाहतों में हरवक्त बेशुमार हो! तुम मेरी धड़कनों में [...]

मुक्तक

मुझको तेरी चाहत में जुदाई क्यों मिली है? मुझको तेरे प्यार [...]

मुक्तक

कबतक तेरी याद में तड़पता मैं रहूँ? कबतक तेरी चाह में तरसता [...]

मुक्तक

तेरा दिल में जब कभी ख्याल आता है! दर्द-ए-तन्हाई का सवाल आता [...]

मुक्तक

तेरा दिल में जब कभी ख्याल आता है! दर्द-ए-तन्हाई का सवाल आता [...]

मुक्तक

मेरी नजर के सामने साकी रहने दो! हाथों में अभी जाम को बाकी रहने [...]

मुक्तक

तेरी दिल में ख्वाहिश आ ही जाती है! जख्मों की फरमाइश आ ही जाती [...]

मुक्तक

तेरी दिल मे ख्वाहिश आ ही जाती है! जख्मों की फरमाइश आ ही जाती [...]

मुक्तक

हर शाम चाहतों की आहट सी होती है! हर शाम जिगर में घबराहट सी [...]