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Author: Megha Rathi

Megha Rathi
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अभी खुद को समझने की कोशिश में हूँ। इसी प्रयास में जब भावनाये हद से बेहद हो जाती है तो कविता ग़ज़ल या लघुकथा बन जाती है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तोटक छंद

तोटक छंद तज के जग के हर बंधन को अब बैठ गई मन मंथन को मनुहार [...]

मुक्तक

इरादा खुदकुशी का था, इसी से प्यार कर बैठे इरादा कत्ल का भी था, [...]

नाक

नाक " जब तुमसे कह दिया कि नाक छिदवा लो तो समझ में नहीं आता!", [...]