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Author: meenakshi bhasin

meenakshi bhasin
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मेरा नाम मीनाक्षी भसीन है और मैं पेशे से एक अनुवादक हूं। दिल्ली के एक सरकारी कार्यालय में काम करते हुए मुझे करीब सात वर्ष हो चुके हैं। मुझे लिखने का बहुत शौंक है और शायद इसलिए मैं अपना काम बहुत आनंद से करती हूं। मुझे अपना कार्य कोई बोझ नहीं बल्कि अपनी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा लगता है। मेरा मानना है कि लेखनी की ताकत बोलने से कहीं अधिक होती है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

सच है सुविधा का सुख से कोई संबंध नहीं, मन हो बैचेन तो, कंफर्ट में भी कोई दम नहीं

सच है सुविधा का सुख से कोई संबंध नहीं, मन हो बैचेन तो, कंफर्ट [...]

हिंदी दिवस पे हिंदी घुट-घुट के रो रही है

हिंदी दिवस पे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं पर मुझे तो ऐसा [...]

हमारी रुहें कुपोषण का शिकार क्यों हैं?

हमारी रुहें कुपोषण का शिकार क्यों हैं? सजी धजी रंग बिंरगी [...]

नेता जी को आम जन की गुहार

भई हर साल चुनाव में मैं मतदान तो कर आती हूं क्योंकि यह मेरा [...]

हे पौरुषत्व –अपील है तुमसे हमारी

Displacement of anger मैने सुना था और Displacement of energy मैने खोजा है। हर रोज हम [...]

हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

15 अगस्त आने को है। आज़ादी मिल चुकी है। मिली क्यों कि तब हमारे [...]

तुम बड़ा काम करती हो

तुम बड़ा काम करती हो तब सिर्फ पढ़ने का ही काम था वैसे सारा [...]

सुन ले मां- बेटी की पुकार

लोगों की मानसिकता जो वहशियाना और राक्षसी रुप लेती जा रही है, [...]