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Author: मोनिका भाम्भू कलाना

मोनिका भाम्भू कलाना
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कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे, भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

किनारा हो जाऊँगी..

बाहर का तम दिल के जितना घना नहीं, डूबी इसमें तो पार हो ही [...]

बेटी हूँ मैं…

लाख जंजीरें हो बंधी हुई कितनी ही बेड़ियों में जकड़ी हुई ख़ुशी [...]

रोग

तेरा ख़्याल ही मेरा रोग था,, तुझे छोड़ने के बाद,बहुत अच्छी हूँ [...]

अब चलूंगी मैं..

तुम मिलों न मिलों अब चलूंगी मैं... तुम हो न हो अब जियुंगी [...]

राहें

राहें साथ चले सदा, राहगीर की तरह,,, हमसफ़र की ख्वाहिस किसको [...]