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Author: manisha joban desai

manisha joban desai
Posts 27
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Architect-interior designer from surat -gujarat-india writng story -gazals-haiku in gujarati and hindi

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

काफी नहीं ?

बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मैं, आसमान से टपकते [...]

कुछ फैसले दिल के

"इतना सुहाना मौसम और ये पहाड़ के बीच घिरा हुआ काटेज काश,तुम [...]

अब क्या कहें?

"जितवन .....क्या कर रहे हो बाहर ? देखो ये कोन आया है ?" माँ की आवाज़ [...]

लकी

लकी, सुबह के नौ बज़े सृजन चायका कप लिये टीवी देख रहा था की [...]

ज़िंदगी तो है…

ज़िंदगी तो है पर यहाँ साथ में ही ये गम क्यो है , हरपल यहाँ [...]

मुहिम

मुहिम कैसे हो पारसजी ?कहते हूँए विमलजी बंगलो की सोसायटी में [...]

खुशबु रिश्तो की -लघुकथा

खुशबु रिश्तो की बाबूजी एकदम गुस्सा होकर चिल्ला रहे थे ,"कभी [...]

क्यों ऐसा?

क्यों ऐसा ? विश्वा जल्दी से अपनी कंपनी की बस से उतरती हुई घर [...]

प्यारी सी बेटियाँ

इस दुनियांमें ऐसा कोई काम नहीं है जो बेटियोंने करके ना [...]

प्यारी सी बेटियाँ

इस दुनियामें ऐसा कोई काम नहीं है जो बेटियों ने करके [...]

ये मेरा दोष है?

ये मेरा दोष है? अपने वार्डरोब से जल्दी से साड़ी निकालकर पहन [...]

है सभी तो सफर में…

है सभी तो सफर में इस जिंदगी में जो यहाँ, फिरते है अक्सर उदास [...]

आओ तो सही…

नज़रमें तुम्हें बसा लेंगे यूॅ आओ तो सही, दिल के कमरे में हमें [...]

किनारा चुन लिया…

खिलते हो फूल या कांटे उन को पूछा न ज़रा, एक सुनहरा- सा ख्वाब [...]

यूॅंही मन के आकाश में…..

यूँही कभी मन के आकाश में उड़ते चले आते हे यादो के पंछी [...]

गज़ल

तुम जो मेरे यहाँ ही अगर हो , जिंदगी की रात की तो,सहर हो। यूँ न [...]

गज़ल

ऐक शाम हॅसी अजनबी हो गई, सांस मेरी भी अनकही हो गई जो चहेरे [...]

गज़ल

आपका वो मिलना तो याद है दिलका वो खिलना तो याद है। जिस तरहा [...]

गीतीका

दिल में है जो वही बातें कहें। आप ही के साथ यूँ गाते रहें छिड़ [...]

गज़ल

आज खुदसे प्यार करने दो हमें ओर थोडा ओर कहने दो हमें। जिंदगी [...]

स्त्री-शक्ति

स्त्री शक्ती [...]

मेरा आत्मसम्मान

मेरा आत्मसम्मान मेरा आत्मसम्मान रात ऐसे मध्यम सी ढल रही [...]

मेरा विश्र्वास

मेरा विश्र्वास यूॅंही माेल में घूमते हुए आठ बज चुके [...]

शाम का साया

शाम का साया तेज दौड़ती हुई ट्रेन की खिड़की के पास बैठी हुई [...]

समजौता

समझौता अभी तो सुबह के ८- ३० हुए थे ।। जल्दी तैयार होकर नित्या [...]

कुछ तूटा है दिलमें…

कुछ टूटा है दिल में .... मानसी बहेेती नदी की लहरों को रेलिंग के [...]

स्वरिता

'अरे ,चलो देर हो रही है 'कहते हुँऐ अंगना अपनी छोटी सी बेटी [...]