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Author: मनीषा गुप्ता

मनीषा गुप्ता
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शिक्षा - हिंदी स्नातकोत्तर कृतियां - बरसात की एक शाम नाट्य विधा - औरत दास्ताँ दर्द की नाट्य विधा - जिंदगी कैसी है पहेली अनेक पत्र पत्रिका में कहानियां , लेख , और कविताएं

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गौरेया

चूं चूं करती जब चिड़िया रानी सुबह सुबह बुलाती है ... उसकी यह [...]

तेरी याद😔

बहुत #प्यार # करते # हैं #तुम # से # सनम # दिल के खाली कोने में हम [...]

दर्द

मायूसी को छोड़ मुस्कराना सीख लिया हमने भी अपने दर्द को छुपाना [...]

आह

खुबाब पल भर का दिखा कर इन्तजार सदियों का दे गई आँखे खाई थी [...]

बेटियां ( क्यों ओ बाबुल )

बेटियां ( क्यों ओ बाबुल ) क्या खता है ओ बाबुल मेरी जो मुझे कोख [...]

तारीफ़

तारीफ़ एक "शब्द " पर उसमें सिमटा एक रूपसी का श्रृंगार , माँ का [...]

जिंदगी……..

जिंदगी। हर बार पिघलते देखा तुम को जिसने जैसे चाहा [...]

खामोशियाँ

ख़ामोशी से पन्नों पर लिख दी जिंदगी .... कुछ आरज़ू लिखी कुछ [...]

यादें

मनु स्मृतियों सी जब हो जाती हैं "यादें" रंग ए"पलाश " उसमें [...]

शाख़

हक़ हवा को जब तेज़ बहने के हासिल हो जाते हैं ..........!! यादों की [...]

जज़्बात

दरमियाँ तेरे मेरे , कुछ जज़्बात मासूम से ख्यालात , सर्दियों की [...]