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Author: manan singh

manan singh
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन

2122 2122 212 चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन बन बोलती हैं [...]

बेटियाँ

चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन बन बोलती हैं [...]

दिन बदलते……

दिन बदलते देर लगती कब बता? भेड़ बनकर घूमता है भेड़िया।1 लूटकर [...]

अपरिचित

पल- पल से मैं आज अपरिचित जानी-सी आवाज अपरिचित।1 उड़ता जाता [...]

चोर(लघु कथा)

चोर(लघु कथा) ************ गाँव में चोरों का प्रकोप बढ़ रहा था। लोग [...]

चलो रोशनी…..

गीतिका/हिंदी गजल#(दीप-पर्व पर) (वाचिक भुजंगप्रयात छंद) *** [...]

हिंदी गजल/गीतिका

#गीतिका# *** टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये जोड़कर [...]

यूँ ही मरने की बात न कर

गजल# *** यूँ ही मरने की बात न कर जीवन ऐसे सौगात न कर।1 रहमत है [...]

गजल(सरहद)

#गजल# *** होंगे उनके ढ़ेरों मकसद भूल गये हैं वे अपनी [...]

हर सुबह दीया बुझाता हूँ

हर सुबह दीया बुझाता हूँ शाम होते फिर जलाता हूँ।1 टूटते रहते [...]

गीतिका

अभी तो बस जरा हमने कला अपनी दिखायी है समझ में लग रहा उसको भली [...]

गजल(लूट का धंधा करें जो वे सभी रहबर हुए)

लूट का धंधा करें जो वे सभी रहबर हुए जिंस कुछ जिनकी नहीं है आज [...]

गजल

#गजल# *** नहीं चाहता जो कराती, बता दे, अलग राह तू क्यूँ चलाती [...]