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Author: maheshjain jyoti

maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

सावन की मल्हार

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 * मल्हार * ---------- अब कै तौ बिछुड़े , भायेली जानै कब [...]

शिव स्तुति

* शिव महिमा * ------------- कैलाशी अविनाशी है जो , डम-डम डमरू जिसका बोले [...]

बाँसुरी

* बाँसुरी * -------- ब्रजभाषा में छंद ------------ जबहु निहारी कभी श्याम [...]

महीना आयौ सावन कौ

लोकगीत ------------- * महीना आयौ सावन कौ * ********************** झूला आँगन में [...]

* शिव महिमा *

* शिव महिमा * ************** बाबा भोले भंडारी की देखी महिमा अपरम्पार [...]

* बेटियाँ *

बेटियाँ तो हैं कली सी डाल से इनको न तोड़ । हैं बहुत नाजुक सभी [...]

* बेटियाँ *

बेटियाँ तो हैं कली सी डाल से इनको न तोड़ । हैं बहुत नाजुक सभी [...]

आदमी

पिसते' पिसते आज बौना हो गया है आदमी । मातमी ख़त का सा' कौना हो [...]

बात एक फूल से…!

फूल डाल का मुझसे बोला , मुझे तोड़ने वाले पहले ,सुन ले बात मेरे [...]

सवैया छंद

कभी भी नहीं छोड़ना हाथ माते , करें प्रार्थना मान लीजे हमारी [...]

शिव भजन

सावन के प्रथम सोमवार को सभी शिव भक्तों को सादर.....! // भजन [...]

नमन शारदे

शारदा माँ को हमें नित सिर नवाना चाहिए । वन्दना कर के हमें [...]

नमन शारदे

शारदा माँ को हमें नित सिर नवाना चाहिए । वन्दना कर के हमें [...]

नमन शारदे

शारदा माँ को हमें नित सिर नवाना चाहिए । वन्दना कर के हमें [...]

कुछ परिभाषाएँ…!

कसम ---- बातों की श्रंखला में विश्वास की चेष्टा और झूँठ की [...]