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Author: महावीर उत्तरांचली

महावीर उत्तरांचली
Posts 31
Total Views 593
एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

एक श्वान की व्यथा

मोती यानी "मैं" और जैकी नरकीय 'पिताजी'! (क्योंकि हमारे कर्म ऐसे [...]

बुलन्द अशआर

ज़िन्दगी हमको मिली है चन्द रोज़ मौज-मस्ती लाज़मी है चन्द [...]

टुकड़ा टुकड़ा यादें (प्रतिनिधि कहानी)

वह अब भरी दुनिया में अकेली थी। ऐसा नहीं कि उसका कोई सगे वाला [...]

अर्थपुराण (प्रतिनिधि कहानी)

"कहाँ घुसा जा रहा है कंजर? आँखें फूट गई हैं क्या?" पोछा लगाते [...]

बेटी

माँ-बाप के दुःख में रोती है। बेटी तो बेटी होती है।। सेवा में [...]

दिल से उसके जाने कैसा बैर निकला

दिल से उसके जाने कैसा बैर निकला जिससे अपनापन मिला वो ग़ैर [...]

सोच का इक दायरा है, उससे मैं कैसे उठूँ

सोच का इक दायरा है, उससे मैं कैसे उठूँ सालती तो हैं बहुत [...]

हार किसी को भी स्वीकार नहीं होती

हार किसी को भी स्वीकार नहीं होती जीत मगर प्यारे हर बार नहीं [...]

बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते

बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते यही उपहार देते रोज़ अपने ज़मीं [...]

जां से बढ़कर है आन भारत की

जां से बढ़कर है आन भारत की कुल जमा दास्तान भारत की सोच ज़िंदा [...]

साधना कर यों सुरों की, सब कहें क्या सुर मिला

साधना कर यों सुरों की, सब कहें क्या सुर मिला बज उठें सब साज [...]

जो व्यवस्था भ्रष्ट हो, फौरन बदलनी चाहिए

जो व्यवस्था भ्रष्ट हो, फौरन बदलनी चाहिए लोकशाही की नई, सूरत [...]

नज़र में रौशनी है

नज़र में रौशनी है वफ़ा की ताज़गी है जियूँ चाहे मैं जैसे ये मेरी [...]

राह उनकी देखता है

राह उनकी देखता है दिल दीवाना हो गया है दूर तक बिखरा पड़ा [...]

तेरी तस्वीर को याद करते हुए

तेरी तस्वीर को याद करते हुए एक अरसा हुआ तुझको देखे हुए एक [...]

तिलचट्टे

"वो देखो दाने-पानी की तलाश में निकलती तिलचट्टों की भीड़," लेबर [...]

मुश्किल समय

"अरे लखनवा, मैं कई दिनों से देख रहा हूँ। तुम जितना कमाते हो। [...]

जनक छन्द

१. जनक छंद की रौशनी चीर रही है तिमिर को खिली-खिली ज्यों [...]

एक मई का दिन

कुछ भी तो ठीक नहीं इस दौर में! वक्त सहमा हुआ एक जगह ठहर गया [...]

जिसमें सुर-लय-ताल है

जिसमें सुर-लय-ताल है, कुण्डलिया वह छंद  सबसे सहज-सरल यही, छह [...]

कुण्डलिया के छंद में

कुण्डलिया के छंद में, कहता हूँ मैं बात  अंत समय तक ही चले, यह [...]

मेरे 20 सर्वश्रेष्ठ दोहे

ग़ज़ल कहूँ तो मैं 'असद', मुझमे बसते 'मीर' दोहा जब कहने लगूँ, [...]

माँ

"सूरा-40 अल-मोमिन," पवित्र कुरआन को माथे से लगाते हुए उस्ताद [...]

मास्टर जी

"मोहन जी," ठीक मेरे पीछे से पुकारे गए किसी स्त्री स्वर ने मेरी [...]

नस्लें (प्रतिनिधि कहानी)

"अरे भाई ये किसकी लाश है? हमारे बरामदे में क्यों रख रहे हो? [...]

मकड़ी-सा जाला बुनता है

मकड़ी-सा जाला बुनता है ये इश्क़ तुम्हारा कैसा है ऐसे तो न थे [...]

यह प्रकृति का चित्र अति उत्तम बना है

यह प्रकृति का चित्र अति उत्तम बना है "मत कहो आकाश में कुहरा [...]

बाण वाणी के यहाँ हैं विष बुझे

बाण वाणी के यहाँ हैं विष बुझे  है उचित हर आदमी अच्छा [...]

पँख टूटे हैं तो क्या परवाज़ करते

पँख टूटे हैं तो क्या परवाज़ करते  पोच है तक़दीर तो क्या नाज़ [...]

कहूँ दर्द अपना मैं कैसे किसी से

कहूँ दर्द अपना मैं कैसे किसी से  कि लगता है डर मुझको अपनी [...]