साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Mahatam Mishra

Mahatam Mishra
Posts 31
Total Views 400

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“बेटियाँ

सादर नमस्कार, साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता बेटियाँ में [...]

हाइकू

“हाइकू” नव रजनी नव रूप धारिणी जै नव चंडी॥-1 भक्त [...]

गीतिका/ग़ज़ल

वज्न- 2122, 2122 2122, 212 “गजल/गीतिका” आदमी चलता कहाँ उठता कदम बिन बात [...]

चौपाई

“चौपाई” बाबा शिव शंभू सैलानी, कीरति महिमा अवघड़ दानी बाजत [...]

कुंडलिया

"कुंडलिया" मानव के मन में बसी, मानवता की चाह दानव की दानत रही, [...]

मुक्तक

शीर्षक मुक्तक - किरण- ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति, [...]

चल अब लौट चलें

एक गीतात्मक मुक्त काव्य, “चल अब लौट चलें” अब हम लौट चलें, चल [...]

गीतिका/ग़ज़ल

एक गीतिका...... काफिया- अर, रदीफ़- जाते , वज्न- 1222 1222 1222 1222 गीतिका बहुत [...]

कुंडलिया

"कुंडलिया" मानव के मन में बसी, मानवता की चाह दानव की दानत रही, [...]

कुंडलिया

चित्र अभिव्यक्ति- “कुंडलिया” बर्फ़ीले पर्वत धरें, चादर अमल [...]

दोहा मुक्तक

अहंकार- दंभ, गर्व, अभिमान, दर्प, मद, घमंड, मान शब्द दोहा [...]

कुंडलिया

“कुंडलिया” ढोंगी करता ढोंग है, नाच जमूरे नाच बांदरिया तेरी [...]

पिरामिड

सादर नमन बीर शहीदों को “पिरामिड” रे पाक हेकड़ी दिखाता है [...]

मनहर घनाक्षरी छंद

मंच को सादर निवेदित एक रचना....... "मनहर घनाक्षरी" बहुत विचार [...]

गज़ल

बहर--1222 1222 1222 1222, क़ाफ़िया – आ, रदीफ़--हुआ होगा [गज़ल] कहीं बातें, [...]

कुंडलिया

“कुंडलिया” अनंत चतुर्थी पावनी, गणपति गिरिजा नेह विघ्न [...]

दोहा मुक्तक

दोहा मुक्तक......आप सभी गुणीजनों को हिंदी दिवस की हार्दिक [...]

वाह रे अपनत्व

प्रस्तुत है एक कथ्य...... "वाह रे अपनत्व" झिनकू भैया दौड़-दौड़ के [...]

मनहर घनाक्षरी छंद

हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई आप सभी को एक कवित्त के [...]

मुक्त काव्य

“कर्म ही फल बाग है” भाग्य तो भाग्य है कर्म ही तो फल बाग है [...]

कुंडलिया

“कुण्डलिया छंद” गुरुवर साधें साधना, शिष्य सृजन रखवार बिना [...]

हाइकू

हाइकू” शिक्षा शिक्षा बेहतर है शिक्षा ले लो शिक्षा॥-1 [...]

दोहा मुक्तक

प्रदत शीर्षक- अलंकार, आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, [...]

कुंडलिया

एक कुण्डलिया छंद. ( ढेल- मोरनी, टहूंको- मोर की बोली) नाचत घोर [...]

गीतिका/ग़ज़ल

मापनी- २,२,२,२,२,२,२,२, पदांत- किया जाता है , समान्त- आन “गीतिका- [...]

कुंडलिया

“कुण्डलिया छंद” गुरुवर साधें साधना, शिष्य सृजन रखवार बिना [...]

कुंडलिया

एक कुण्डलिया छंद. ( ढेल- मोरनी, टहूंको- मोर की बोली) नाचत घोर [...]

मुक्तक

प्रदत शीर्षक- अलंकार, आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर सादर [...]

गीतिका/ग़ज़ल

एक गीतिका/गजल.............मात्रा भार-26 “गीतिका/गजल” घास पूस लिए [...]

मनहर घनाक्षरी छंद

"मनहर घनाक्षरी" सुबह की लाली लिए, अपनी सवारी लिए, सूरज निकलता [...]