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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

** आज महिला दिवस है **

वाह क्या बात है आज महिला दिवस है छद्महस्त नारी का सदा पुरुष [...]

*** हम दिल के मरीज ***

हम दिल के मरीज़ भी कितने अजीब हैं कहते हैं अपनी बहाना गैरों का [...]

** ये दिल हुआ ना कभी अपना **

ये दिल हुआ ना कभी अपना हुआ पराया होकर भी अपना खायी ज़ालिम [...]

** ऐ हुस्नवाले **

ऐ हुस्नवाले तूं इश्क का एहतिराम कर यूं ठुकरा ना बेदर्दी [...]

** चलना थोड़ी दूर था **

चलना थोड़ी दूर था उसमे ही क़दम लड़खड़ा गये फिर क्या जिंदगीभर [...]

** होली के पावन पर्व पर **

****🎂🎂****** होली के पावन पर्व पर मनभेद मतभेद मिटाकर मेरे सभी [...]

** होली खेलत नन्दलाल **

. राधिका गोरी संग ब्रज की छोरी संग बनवारी बिहारी [...]

*** होली के रंग ***

होली के रंग खेलो प्रीतम संग लाल है गुलाल [...]

** अपने ही रंग में **

. कुछ खास लोग जो अपनी भावनाओं का इजहार बेहतर तरीके से करते है [...]

** मौसम बडा नालायक है **

मौसम बडा नालायक है ज़रा रखता नहीं है ख्याल सोहबत छूट [...]

** बादल का गर्जन **

** बादल का गर्जन भौरों का गुंजन इक कसक जगाता है [...]

* जानिसार महबूब *

महसूस करें उसे खुशबू कहते है जान का प्यासा हो उसे दुश्मन [...]

** टप टप पानी **

. टप टप पानी बह रहा है न जाने ये क्या कह रहा है कहीं [...]

* चार शेर *

जीना चाहा था मगर जिंदगी ना मिली । मौत भी अब हमसे अपना दामन [...]

** मुहब्बत का खजाना ***

फ़िजा में आज घुली है जमाने-भर की आबे-बू कुछ क्षण गुस्ल कर लूं [...]

* पति एकता जिंदाबाद *

रविवार का दिन था पीड़ित-प्रताड़ित-पति जुलूस के साथ नारे [...]

*** शुक्र मना ***

ना दुखी हो इतना तूं शुक्र मना............. पांव ही दबवा रही है [...]

** मुझे जुकाम था **

* मेरी आँखों से लगातार आँसू बहे जा रहे थे मै अपने आँसू [...]

स्तुति * शिव शंभो शिव शंभो *

शंभो शिव शंभो प्रभो शूलपाणे प्रभो शंभो शिव शंभो प्रभो [...]

* ऐ स्वर्णपिंजर के अनुरागी *

ऐ स्वर्णपिंजर के अनुरागी क्या तुमने कभी यह सोचा है ? [...]

** आग लगाकर **

प्यास जगाकर आग लगाकर पूछते हो क्या ज़रा दिलपर अपने हाथ रख [...]

* नमन उस नदीश को *

नमन उस नदीश को जिसने झेला नदियों के वेग को नमन उस नदीश को [...]

** आईना जब झूठ बोलता है **

*आईना जब झूठ बोलता है मुस्कुराता हुआ चेहरा दिल मजबूर बोलता [...]

** मुक्तक **

* गुल-ए-गुलशन से कोई फूल तो चुनना होगा । अरे भ्रमर फिर [...]

*** आखिर क्यों ?

जीवन की सन्ध्या बेला में डूबता सूरज ऐसा लगता है [...]

* तेरी मुस्कुराहट *

प्रेम सागर उथला है थाह कभी आती नहीं । इक बार [...]

** शादी के बाद **

आ रहा था एक युवक हट्टा कट्टा मुस्डण्डा सा मूछों पर ताव [...]

** मेरे जीवन साथी **

मेरे जीवन साथी छुपाकर चाँद सा मुखड़ा क्यों [...]

** बीता हुआ समय **

बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता उसकी क़ीमत आंकना बड़ा [...]

** तेरे इंकार में **

तेरे इन्कार में भी इकरार नज़र आता है तेरी नफ़रत में भी प्यार [...]