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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
Posts 299
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

* खूबसूरती निगाहों में होनी चाहिए *

खूबसूरती ख्वाबों में नहीं निगाहों में होनी चाहिए आनन्द [...]

* क्या हम शरीफ इतने कमजोर होते हैं *

कितनी अजीब बात है दोस्तों शरीफ कभी एक नही होते हैं बदमाश एक [...]

*मौत के डर से मर जाया नही करते इंसान*

वक्त कब किसी पे रहम करता है सम्भालों जीना है जहां में [...]

** नमन नमन उस भीम को **

14.4.17 प्रातः 10.30 नमन नमन उस भीम को नमन नमन उस भीम को [...]

* ये राजनीति अब बन्द होनी चाहिए *

14.4.17 **** प्रातः 9.30 ये राजनीति अब बन्द होनी चाहिए ये राजनीति अब [...]

* विश्व ने माना जिसका लोहा *

ज्ञानदिवस की पूर्वसन्ध्या पर ज्ञानपुरुष को उनके जन्मदिवस [...]

** अदालत-ए-इश्क **

मुवक्किल थे हम उनके अदालत-ए-इश्क में पैरवी कुछ इस तरह की [...]

** शुकुं-ए-जिंदगी **

शुकुं-ए-जिंदगी मिले तो कैसे बो दिये है बीज जो अब ऐसे बोएं [...]

** दिल बाग़-बाग होता है **

दिल बाग-बाग होता है जब हाथ कलम पर चलता है अफ़सोस गुस्ताख़ [...]

** ज़ख्म जिंदगी के **

ज़ख्म जिंदगी के सोने ना देते रोने ना देते ज़ख्म जिंदगी के [...]

** साथण म्हारी **

क्यूं दाबे है पांव बावळी तूं तो साथण म्हारी है लोग देख अचरज [...]

* हवाऐं बन्द कमरे की *

मैं उन्मुक्त हवाओं में घूमना चाहता हूं मैं घटाओं को देखकर [...]

* ये जीवन दो दिन का मेला *

मन काहे का गुमान करे, ये जीवन दो दिन का मैला फिर मन काहे [...]

** भीम लक्ष्य **

8.4.17 ***** रात्रि 11.21 भीम लक्ष्य था उस महा मानव का जिसने झेली [...]

* ओ यारा मेरे दिलदारा *

ओ यारा मेरे दिलदारा मैंने तुझ पे दिलवारा दिल का मोल नहीं [...]

** मैं शब्द-शिल्पी हूं **

मैं शब्द-शिल्पी हूंउ शब्दो को जोड़ता हूं मैं विध्वंसक नहीं [...]

*. और क्या चाहिए *

महफूज़ दिल के सिवा और क्या चाहिए दिया दर्देदिल के सिवा और [...]

* नजरें करम हो अब हम पे कैसे *

सफ़र जिंदगी का सुहाना हो कैसे नजरें करम हो अब हम पे कैसे [...]

* उम्र अगर ढ़लती नहीं *

2.4.17 प्रातः * 11.7 उग्र अगर यूं ढ़लती नहीं कामनाये यूं छलती [...]

* वन्दे मातरम् –मेरा नजरिया *

मैं सर्वप्रथम मातृभूमि,कर्मभूमि,जन्मभूमि की मानस पूजा करता [...]

किशोर/किशोरियों में एच आई वी /एड्स के प्रति जागरूकता-एक अध्ययन

प्रस्तावना कबीरदास ने कहा है - कबीरा सोई पीर है,जो जाने पर [...]

*** मानवता की मौत ***

आद्रो हुआ है जबसे अपरा अवनि पर बुरी प्रमिति का जन्म हुआ भयसी [...]

** मण्डप में पहुंचने से पहले **

1991 में दहेज प्रथा पर लिखी कविता मण्डप में पहुंचने से पहले [...]

** कैसी ख़ामोशी **

मैं खामोश हूं, पर जुबां बोलती है जुबां जो कहती है,वह मन की [...]

** प्रिया **

प्रिया चली गयी,कहां गई ? क्यों चौंकता है तूं ? हां यहीं है खोल [...]

* यही है क्या तुम्हारा समाज *

जिसे तुम कहते हो समाज पर वो नहीं है सम आज दीवारें खींच दी है [...]

*** बाल गीत **

प्यारा चंदा प्यारे तारे आसमान में चमके सारे । सूरज के आने [...]

*** मेघा ना हीँ बरसे ***

मेघा ना हीं बरसे अंखियां बरसे मोरी पिया घर ना आये अंखियां [...]

** मोरों दे बिच **

बैठी मोरों दे बिच गोरी हाथ में लेके मोर पंख ** सोचन लागी मन [...]

** मकां-मकां -मालिक **

वादों और इरादों में रखा है क्या वादे सदा झूठे वादे निभाता [...]