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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

शेर (20 Posts)


*** हुकूमत करना चाहते हो ***

हुकूमत करना चाहते हो मेरे दिल पर और मज़ार पे आकर रोते [...]

*ये आँखें तेरी कत्लखाने से कम नहीं*

18.8.17 **** प्रातः **** 7.58 ये आँखे तेरी किसी कत्लखाने से कम नहीं है [...]

*** मत पूछ ***

मत पूछ मुझे महोबत ने क्या क्या दिया बहुत से जख्म दिए कुछ और [...]

**** आपका अंदाज ****

खूबसूरत-ए-शोभा नहीं शरीर की आभा जनाब । शोभा-ए-खूबसूरत [...]

*** मेरे पसंदीदा शेर ***

मैं मशगूल था अपने ही ख्यालों में कब मशहूर हो गया क्या पता [...]

*** धीमा जहर ***

ना जाने कौन सा धीमा जहर मेरे सीने में उतर आया है ना चैन से [...]

*** चंद शेर ***

कशमकश दिल में जुबां पे तुम्हारा नाम आया भरी महफ़िल में फिर [...]

*** शेर ***

कत्ल करके पूछते हो दर्द हुआ या नहीं मुहब्बत करके देखो पता चल [...]

**** मरने से कौन डरता है ****

मरने से कौन डरता है कमबख्त यहां तो जीने से ही तंग आ गए [...]

*** शेर ***

कश्तियां डूबी है बीच मझधार जाकर हाथ से छूटा अब जो प्यार [...]

*** कुछ शेर ***

हक़ीक़त में सम्भव नहीं उनको रुलाना क्यों न तसव्वुर में ही [...]

** आरजू **

आरजू दिल की है तमन्ना शब-ए-रोज की है ऐ जिंदगी तूं तो बस कुछ [...]

** अदालत-ए-इश्क **

मुवक्किल थे हम उनके अदालत-ए-इश्क में पैरवी कुछ इस तरह की [...]

* चार शेर *

जीना चाहा था मगर जिंदगी ना मिली । मौत भी अब हमसे अपना दामन [...]

** सही कहा **

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता सख्त हो तो दांत जरूर तोड़ सकता [...]

** पांच शेर **

तेरी जुल्फ की तरह उलझी है मेरे प्यार की गुत्थी जितना [...]

** सात शेर ***

हमारा प्यार भी कभी जो किस्सा बन जाता है अगर यार को रिश्ता [...]

**** शेर ******

23.1.17 रात्रि 10.5 बागे बुलबुल को अब मुस्कुराना ही होगा [...]

*** चंद शेर ***

नूर तेरी नजरों का ना देख पायेंगे अब जिस्म की चकाचौंध से [...]

शेर

12.12.16 ******* दोपहर 1.15 समझ नहीं आता इस हुस्न को क्या नाम दूं एक [...]