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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

विधाएं

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मुक्तक (74 Posts)


मुक्तक :- क़ातिल निगाहें

क़ातिल निगाहें हुआ करती थी कभी मुस्कान से जी जाया करते [...]

*** ग़ुस्ल कर लूं ***

ग़ुस्ल कर लूं तेरी स्मित मुस्कान में नहीं टिक पाऊंगा [...]

** ज्योति से याराना कर लो **

बाहरी चकाचौंध से अब मेरे यारों किनारा कर लो अब दिल में [...]

** दर्द सा उठता है धुंआ **

दिल में दर्द सा उठता है धुआं आज तक गैर अपना ना हुआ करते [...]

** अजीब बात **

कितनी अजीब बात है दोस्तों शरीफ कभी एक नही होते हैं बदमाश एक [...]

***** दर्द का अहसास ***

अपनी भी हालत पेड़ से गिरे सूखे पत्ते-सी हो गयी है लोग [...]

** गुमसुम आज मेरा दिल है **

😢रुक गयी है स्वांसे थम गयी है आंधियां न जाने कौन सा कत्ल [...]

** दुःख किण सूं कहूं साजना **

दुःख किण सूं कहूं साजणा दिन गिणतां रातां गिणी सुपणा अब सब [...]

** चलन है प्यार में रुसवाई का ***

पिघलती है बर्फ तो पिघलने दे सुलगती है आग तो सुलगने दे दिल [...]

** चुपचाप **

जख़्म सहते रहे जो मुहब्बत में सब चुपचाप देश के वास्ते [...]

** जरा दिल साफ हो ले **

12.3.17 सन्ध्या 7.15 मुश्किलें बहुत है राहे मंजिल मुश्किलों से दो [...]

*** ये क्या कम है **

मत दुखी हो अपने अभावों से अभावों में भी भाव छुपा होता [...]

*** ईश्वर की धर्मशाला ***

यह संसार ईश्वर की धर्मशाला है जब [...]

** चित चंचल ***

रूप चंचल मन चंचल मची दिल में हलचल आज मन पहल कर नव यौवना चित [...]

*** चुरा ले नींद कोई ***

चुरा ले नींद कोई हमारी कोई बात नहीं चुराये सपनों को हमारे [...]

** विश्वास मुझपे ना कर **

इतना भी विश्वास मुझपे ना कर कि तूं धोखा खा जाये इतना भी उधार [...]

** यूं ही नहीँ **

महक मेरे दिल की बहुत दूर तलक जाती है यूं ही नहीं तितलियां [...]

** आस्था ***

दर्द जब पीर बन कर उभर गया दिल का दुःख जाने किधर गया पीड़ा [...]

* जानिसार महबूब *

महसूस करें उसे खुशबू कहते है जान का प्यासा हो उसे दुश्मन [...]

** आग लगाकर **

प्यास जगाकर आग लगाकर पूछते हो क्या ज़रा दिलपर अपने हाथ रख [...]

** मुक्तक **

* गुल-ए-गुलशन से कोई फूल तो चुनना होगा । अरे भ्रमर फिर [...]

** तेरे इंकार में **

तेरे इन्कार में भी इकरार नज़र आता है तेरी नफ़रत में भी प्यार [...]

* किसी के मन में चाहत ना हो *

मत टूट शीशे की तरह मत बिखर शीशे की तरह कहीं मेरे मासूक [...]

** मां के चरणों में सादर नमन **

माँ से पत्नी प्यारी होती है पति की पत्नी असाध्य बीमारी होती [...]

***** मंजिलें मेरे कदमों तले ******

मै मंजिलों की तलाश में भटका नहीं बोलो कहां आज मंजिले मेरे [...]

*** मैं जिसे पसन्द हूं ***

बहुत बार मन में ऐसा ख्याल आता है कि मै जिसे पसन्द हूँ उसे [...]

* इस आदत को सुधारा ना जाये *

इतना भी विश्वास मुझपे ना कर कि तूं धोखा खा जाये इतना भी उधार [...]

* हम तक़दीर कहां बना पातें हैं *

तकदीरें बनती बिगड़ती है हम तक़दीर कहां बना पाते हैं मगर [...]

मैं वो मजमूं ढूंढता हूं

मैं वो मजमूं ढूंढता हूं जिस पर वो निसार हो मैं वो राह [...]

* हुश्न की बारीकियां *

यूं राज-ए-हुस्न कब तक छुपाओगे मुझसे हुस्न की बारीकियां [...]