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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
Posts 368
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुक्तक (100 Posts)


** मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती **

चाहत कभी गुमनाम नहीं होती राहे कभी सुनसान नहीं होती [...]

***** अब तो ****

दिल टूट चुका है अब तो सब लुट चुका है अब तो कौन बचाये इस मंजर [...]

*** भावनाओं पर किसका पहरा ***

दिल आखिर दिल जो ठहरा भावनाओ पर किसका पहरा उम्र हसीनाओं [...]

*** कुछ हसरतें ***

कुछ हसरतें कुछ ख्वाहिसें दिल में बाकि है पूरा करें तो [...]

*** पगडण्डियां ललचाती ***

चलो अब जीवन-पथ पर पगडण्डियां ललचाती है सपाट सड़क आम रास्ता [...]

*** प्यार तो आकृति से ही होता है **

कोई डगमगाता है तो कोई लड़खड़ाता है जीवन के रास्ते विद्रूप [...]

**** मेरे मुकद्दर में ***

मेरे मुकद्दर में शायद इक बात लिखी है तेरे हुस्न-ओ-आलम में [...]

*** मुहब्बत का ताज ***

क्यों मेरे जिस्म ने मुहब्बत का ताज पहना ये इश्क की [...]

*** गणित ही बदल डाला ***

सूरज भी तेरे हुस्न की लाली से निकलता होगा फिर तो चाँद भी [...]

*** कुछ मुक्तक ***

जिंदगी चाहे तो अब मुझको ना आराम दे जिंदगी जीने के वास्ते [...]

**** ईदी मुझे मिल जाये ****

ख़्वाब ऐसे कातिलों से गुजर रहे हैं वो हमारे होने से जो मुकर [...]

*** अब डर लगता है ***

अब डर लगता है उनको लिखते ख़त बहुत बुरी चिट्ठियों के चिट्ठों [...]

*** दिल को कह दो ***

रिश्ते बनाने से नही बनते लोग ख़ुद है अपने बनते रूह का साथ [...]

*** दो मुक्तक ***

27.6.17 दोपहर। 3.23 रेत के समंदर - सा सूखा ये दिल मेरा अधूरी - [...]

** मंजर मौत का ***

मंजर मौत का देखकर यह ख़ंजर भी डर जायेगा सब्रकर ख़ुदा के बन्दे [...]

*** कितने खुशख़त **

कितने खुशख़त लिखे मैंने तुझको चिट्ठी लौटती डाक से [...]

**** तेरे शहर में ****

हम तेरे शहर में आये हैं मुसाफ़िर की तरह मुन्तजिर है [...]

** जय महाकालेश्वर **

महाकाल ने जिसे बुलाया ना टाल पाया मंत्र महामृत्युंजय मौत [...]

** कोई बात नही **

बात-बेबात मुझसे ना कर बात कोई बात नहीं कर दे कत्ल [...]

** गुनाह तो नहीं था **

14.5.17 दोपहर 1.41 मेरा इश्क महज़ एक हादसा तो नहीं था जुल्म करे मैं [...]

* ** ऋतु पावस ***

ऋतु पावस थी निकट अमावस थी यौवन की वह घटा-छटा विकट थी मन- [...]

*** क्यूं किससे ***

मायूस हो हम फुर्कत-ए-इश्क में रोए तुम सोचोगे खदीन ख़्वाब [...]

** तुम वफ़ा क्या जानो **

6.5.17 ***** रात्रि 11.11 तुम वफ़ा क्या जानो तुम जफ़ा क्या जानो क्यों [...]

** सिर्फ प्यार ही प्यार हो **

याद आते हैं क्यूं बीते लम्हे जो गुजारे थे उनके साथ रुलाते [...]

** कुरेदा है लफ्जो से **

कुरेदा है लफ्ज़ो से ज़ख्मो को इस क़दर तन्हाई में रोका,आज महफ़िल [...]

* खूबसूरती निगाहों में होनी चाहिए *

खूबसूरती ख्वाबों में नहीं निगाहों में होनी चाहिए आनन्द [...]

*मौत के डर से मर जाया नही करते इंसान*

वक्त कब किसी पे रहम करता है सम्भालों जीना है जहां में [...]

* उम्र अगर ढ़लती नहीं *

2.4.17 प्रातः * 11.7 उग्र अगर यूं ढ़लती नहीं कामनाये यूं छलती [...]

मुक्तक :- क़ातिल निगाहें

क़ातिल निगाहें हुआ करती थी कभी मुस्कान से जी जाया करते [...]

*** ग़ुस्ल कर लूं ***

ग़ुस्ल कर लूं तेरी स्मित मुस्कान में नहीं टिक पाऊंगा [...]