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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

विधाएं

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कविता (117 Posts)


कविता :- पेड़ो के झुरमुट में

💐पेड़ो के झुरमुट में 💐 🎂🎂🎂🎂🎂🎂 विस्फारित नयनो से ढूढ़ता [...]

*** ऐ जानेमन ***

22.5.17 **रात्रि** 10.31 चाहत छुपाकर क्यों होते हो आहत रखोगे इस क़दर [...]

*** ये दिल आपकी सम्पति है ***

ये दिल आपकी सम्पति है जब तुम चाहो सो तोड़ दो लेकिन [...]

*** अफ़साना ***

अफ़साना फ़लक से गिरती हुई उस शबनमी-शै का क्या कहें पलक से [...]

*** मूर्ख कौन ? **

3.5.17 ***** रात्रि 11.7 देश के सैनिकों को समर्पित मेरी प्रथम रचना [...]

** तेरी मोहब्बत बडी बेलगाम है **

तेरी मोहब्बत बडी बेलगाम है प्यार के तांगे में जुतकर भी [...]

*** त्रिशंकु जिंदगी ***

मुसाफ़िर को जाना किधर था रोका घर के मोह ने उसे था क्या पता था [...]

* ये राजनीति अब बन्द होनी चाहिए *

14.4.17 **** प्रातः 9.30 ये राजनीति अब बन्द होनी चाहिए ये राजनीति अब [...]

* विश्व ने माना जिसका लोहा *

ज्ञानदिवस की पूर्वसन्ध्या पर ज्ञानपुरुष को उनके जन्मदिवस [...]

** साथण म्हारी **

क्यूं दाबे है पांव बावळी तूं तो साथण म्हारी है लोग देख अचरज [...]

* हवाऐं बन्द कमरे की *

मैं उन्मुक्त हवाओं में घूमना चाहता हूं मैं घटाओं को देखकर [...]

* ये जीवन दो दिन का मेला *

मन काहे का गुमान करे, ये जीवन दो दिन का मैला फिर मन काहे [...]

** भीम लक्ष्य **

8.4.17 ***** रात्रि 11.21 भीम लक्ष्य था उस महा मानव का जिसने झेली [...]

** मैं शब्द-शिल्पी हूं **

मैं शब्द-शिल्पी हूंउ शब्दो को जोड़ता हूं मैं विध्वंसक नहीं [...]

*** मानवता की मौत ***

आद्रो हुआ है जबसे अपरा अवनि पर बुरी प्रमिति का जन्म हुआ भयसी [...]

** मण्डप में पहुंचने से पहले **

1991 में दहेज प्रथा पर लिखी कविता मण्डप में पहुंचने से पहले [...]

** कैसी ख़ामोशी **

मैं खामोश हूं, पर जुबां बोलती है जुबां जो कहती है,वह मन की [...]

** प्रिया **

प्रिया चली गयी,कहां गई ? क्यों चौंकता है तूं ? हां यहीं है खोल [...]

* यही है क्या तुम्हारा समाज *

जिसे तुम कहते हो समाज पर वो नहीं है सम आज दीवारें खींच दी है [...]

** मकां-मकां -मालिक **

वादों और इरादों में रखा है क्या वादे सदा झूठे वादे निभाता [...]

** अधपको फळ **

बण अध्यापक आयो जिण अधपको फळ रसाकसी पकणे री चाली पण समय सूं [...]

*** मुझे निभृत चाहिए ***

मुझे निभृत चाहिए या जीवन का अवसान सियरान हो जाये मेरा [...]

*** अज्ञान तिमिर ***

जीवन में अज्ञान-तिमिर का फैला है विस्तृत मैदान कौन हटाये [...]

*दिलजलों की तो जलने की आदत होती है *

कल्बे-सोजा जलते रहेंगे मुहब्बत के चिराग से दिल का हाल पूछो [...]

** सच तो सच है **

सच मैं किसको कहूं जो दिखाई देता है उसे या जो समझ में नहीं आता [...]

*** जल -बिन मीन ***

रैन गयी रमता-रमता दिवस भयो परभात जिण मिलना था मिली गया वा [...]

*** तदबीरें जीने मरने की ***

हरकते-ए-खदीन देखता हूं जब सोचता हूं इफ्तार-ए-दावत रोज रोज़ा [...]

*** मन-मोर ***

मन-मोर ललचाए किस ओर यह मोर मन जान ना पाए है आतप नहीं ग्रीष्म [...]

*** तुम कौन हो ? ***

ख्यालों की मलिका मिलूं तुमसे कैसे मेरी जां तेरी कसम [...]

*** मोके रो फायदों ***

मोके रो फायदों कुण नी उठावे कईं लुगाई अर कईं आदमी मोको [...]