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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

* वन्दे मातरम् –मेरा नजरिया *

मैं सर्वप्रथम मातृभूमि,कर्मभूमि,जन्मभूमि की मानस पूजा करता [...]

किशोर/किशोरियों में एच आई वी /एड्स के प्रति जागरूकता-एक अध्ययन

प्रस्तावना कबीरदास ने कहा है - कबीरा सोई पीर है,जो जाने पर [...]

*** मानवता की मौत ***

आद्रो हुआ है जबसे अपरा अवनि पर बुरी प्रमिति का जन्म हुआ भयसी [...]

** मण्डप में पहुंचने से पहले **

1991 में दहेज प्रथा पर लिखी कविता मण्डप में पहुंचने से पहले [...]

** कैसी ख़ामोशी **

मैं खामोश हूं, पर जुबां बोलती है जुबां जो कहती है,वह मन की [...]

** प्रिया **

प्रिया चली गयी,कहां गई ? क्यों चौंकता है तूं ? हां यहीं है खोल [...]

* यही है क्या तुम्हारा समाज *

जिसे तुम कहते हो समाज पर वो नहीं है सम आज दीवारें खींच दी है [...]

*** बाल गीत **

प्यारा चंदा प्यारे तारे आसमान में चमके सारे । सूरज के आने [...]

*** मेघा ना हीँ बरसे ***

मेघा ना हीं बरसे अंखियां बरसे मोरी पिया घर ना आये अंखियां [...]

** मोरों दे बिच **

बैठी मोरों दे बिच गोरी हाथ में लेके मोर पंख ** सोचन लागी मन [...]

** मकां-मकां -मालिक **

वादों और इरादों में रखा है क्या वादे सदा झूठे वादे निभाता [...]

*बोल सियावर रामचन्द्र की जय*

हे मारुत नन्दन मारुती सुन क्रंदन सुन क्रंदन दुःख हर भय [...]

मुक्तक :- क़ातिल निगाहें

क़ातिल निगाहें हुआ करती थी कभी मुस्कान से जी जाया करते [...]

** वाह दिल हमारा हो गया **

वाह दिल तुम्हारा हमारा हो गया क्यूं मिलूं तुमसे किसी बहाने [...]

** तेरा नाम ले के जीते हैं **

तेरा नाम ले के जीते हैं हर सुबहा और हर शाम जीते हैं तेरा नाम [...]

** अधपको फळ **

बण अध्यापक आयो जिण अधपको फळ रसाकसी पकणे री चाली पण समय सूं [...]

** अरमानों की दुनियां **

टूटे हुए दिल के टुकड़ो को जला देंगे अरमानों की दुनियां में [...]

** तुम्हारे बिना **

तन्हा-तन्हा लगता है ये दिन तुम्हारे बिना सूनी-सूनी लगती [...]

** ग़मेंदिल कैसे छुपाऊं **

26.3.17 * गीत * प्रातः 10.14 गीत कोई गुनगुनाऊँ क्या मैं अब तुमको [...]

** कैसे भूल जाऊं **

कैसे भूल जाऊं अपने दिल की आवाज़ दिल को कैसे समझाऊं दिल की [...]

*अफसर की अगाड़ी और घोड़े की पिछाड़ी *

चर्चा का विषय था अफसर अफसर के पास या अफसर से दूर एक मोहतरमा [...]

*** मुझे निभृत चाहिए ***

मुझे निभृत चाहिए या जीवन का अवसान सियरान हो जाये मेरा [...]

*** अज्ञान तिमिर ***

जीवन में अज्ञान-तिमिर का फैला है विस्तृत मैदान कौन हटाये [...]

*दिलजलों की तो जलने की आदत होती है *

कल्बे-सोजा जलते रहेंगे मुहब्बत के चिराग से दिल का हाल पूछो [...]

** सच तो सच है **

सच मैं किसको कहूं जो दिखाई देता है उसे या जो समझ में नहीं आता [...]

*** जल -बिन मीन ***

रैन गयी रमता-रमता दिवस भयो परभात जिण मिलना था मिली गया वा [...]

*** तदबीरें जीने मरने की ***

हरकते-ए-खदीन देखता हूं जब सोचता हूं इफ्तार-ए-दावत रोज रोज़ा [...]

*** मन-मोर ***

मन-मोर ललचाए किस ओर यह मोर मन जान ना पाए है आतप नहीं ग्रीष्म [...]

*** ग़ुस्ल कर लूं ***

ग़ुस्ल कर लूं तेरी स्मित मुस्कान में नहीं टिक पाऊंगा [...]

****दमसाज मेरे ***

दमसाज मेरे तूं ये तो बता तेरा नाम है क्या ? तेरा क्या है पता [...]