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Author: भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल
Posts 383
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

*** हुकूमत करना चाहते हो ***

हुकूमत करना चाहते हो मेरे दिल पर और मज़ार पे आकर रोते [...]

*** मेरा ***

ख़्वाहिश थी तेरी या फिर सिर फिरा था मेरा बज़्म में आकर अक्सर [...]

*** मत, भेद रखिए ***

मतभेद रखिए मन भेद ना रखिए ज़िगर में जुदा हर शख्स है फिर भी [...]

*** निजभाषा सम्मान ***

एक उम्मीद है जगाई निजभाषा सम्मान हिंदी हिन्द की पहचान है [...]

*** बयां करना मुश्किल है ***

ये अल्फाज़ो से बयां करना मुश्किल है ये रिश्ता दोस्ती का [...]

*** मत सोच ***

मत सोच अपनों के बारे में इतना पोच चलते चलते जब पांव में आ [...]

*** यू एण्ड मी ***

यू एण्ड मी सम डिस्टेंस यू एण्ड मी फिजिकली नॉट [...]

*होश खोकर जिंदगी कभी अपनी नहीं होती*

मत कर खत्म जिंदगी की महक महखाने में जाकर लौट कर जब तलक [...]

*** मुझे आना पड़ा ***

भीड़ से हम दूर थे बहुत पर भीड़ में आना पड़ा होकर मज़बूर जो तेरे [...]

*** इतनी फुर्सत कहां ***

इतनी फुर्सत कहां मिलती है हमको जो तेरा सूरत-ए-हाल लिखें [...]

** नहीं कम किसी से हम **

ऐ चाँद तुझको फलक से ज़मी पर उतार लाएंगे हम मत दिखा तूं अपनी [...]

** भ्रमित कर रहा कान्हा **

25.8. 16 दोपहर13.25 कैसे भ्रमित कर रहा कान्हा देखो जन्मदाता के [...]

** उस वेवफा से क्या कहें **

उस वेवफा से क्या कहें हाल -ए -दिल अपना जिसे हाल-ए-दिल खुद [...]

** बादळी सुहावणी **

दिवाळी ने दीप जलास्यां बाती करसी रात्यां राती । इब आवण [...]

*** दास्तां-ए-मुहब्बत ***

दास्तां-ए-मुहब्बत सुनाना चाहता हूं गा गीत तुझको रिझाना [...]

*** जान-अनजान ,खमोश दर्द ***

18.8.17 **** दोपहर **** 3.51 तुम्हें क्या पता जान ये मुहब्बत [...]

*हम संसार चाहते हैं वो संसार से पार लगाना*

कब बिगड़ी है दुनियां उसकी जिसने इंसान से बना के रखी लोग केवल [...]

*ये आँखें तेरी कत्लखाने से कम नहीं*

18.8.17 **** प्रातः **** 7.58 ये आँखे तेरी किसी कत्लखाने से कम नहीं है [...]

*** मत पूछ ***

मत पूछ मुझे महोबत ने क्या क्या दिया बहुत से जख्म दिए कुछ और [...]

** फिर लौटकर मैं इस जहां ना आऊंगा **

मेरी यह रचना मेरी स्वैच्छिक सेवानिवृति 13.7.17 तक मेरे साथ रही [...]

**** आपका अंदाज ****

खूबसूरत-ए-शोभा नहीं शरीर की आभा जनाब । शोभा-ए-खूबसूरत [...]

** प्यार निभानेवाला नहीं मिला **

सुख के साथी मिले हजारों दुःख में साथी नहीं मिला नींद [...]

*** अंधेरे बहुत है ***

अंधेरे बहुत है तन्हाइयों के कह दो तो हम शमां लेके आये कहकर [...]

** मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती **

चाहत कभी गुमनाम नहीं होती राहे कभी सुनसान नहीं होती [...]

*** आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें ***

9.8.17 **दोपहर** 1.16 आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें नजरे करम करना [...]

*** मेरे पसंदीदा शेर ***

मैं मशगूल था अपने ही ख्यालों में कब मशहूर हो गया क्या पता [...]

**** आघात ****

पहुंचा हो आघात अकारण किसी को मेरे कारण आज मैं करता हूं [...]

**** ये काल महा बन जायेगी ****

जीवन में चलना है साथी कुछ फूलों कुछ काँटों पे नादानी अब [...]

*** धीमा जहर ***

ना जाने कौन सा धीमा जहर मेरे सीने में उतर आया है ना चैन से [...]

*** फेसबुक अब हमें तेरा एतबार ना रहा ***

आज मित्रता दिवस पर सभी जाने अनजाने फेसबुक मित्रों को [...]