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Author: Madhumita Bhattacharjee Nayyar

Madhumita Bhattacharjee Nayyar
Posts 37
Total Views 480

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

अपनी राह

क्यों सुनूँ मै सबकी? तेरी, इसकी और उसकी, मुँह बंद कर चलती जाती [...]

तो…

क्या रह गया है बाकी अब? अब क्यों कुछ कहना है बताओ तो! दूरियाँ [...]

गर मै….

गर मै हवा होती, चहुँ ओर मै बहती रहती, कभी अलसाई सी, कभी पगलाई [...]

शायर से मुहब्बत

कभी किसी शायर के मोह मे मत पड़ना, कभी दिल ना लगाना, ये ढाल बन [...]

मनचला चाँद

देखो ना! ये चाँद रोज़ रात आ धमकता है, खिड़की से मुझे रोज़ तकता [...]

ख़्वाब हो तुम…

बंद करती हूँ मै जब ये आँखें तुम्हारे बग़ैर, हर तरफ स्याह सा [...]

तुम्हारी हँसी

शांत पानी को दीवाना बना जाती है तुम्हारी हँसी, असंख्य तरंगे [...]

दुनिया मेरी…

कुछ मायके जाती हैं, तो कुछ दफ़्तर, कुछ दूर देश हो आती हैं, कुछ [...]

बारिश की बूंदें

जलती हुई सूरज की किरणों के बीच, तपती हुई हर चीज़, जल, थल, खेत, [...]

रावण

सोचो गर स्याह, स्याह ना हो! श्याम, श्याम ना हो! गहरी कालिमा [...]

ये रात….

सारी रात तुम्हारे हाथों को थाम चुप बैठना चाहती हूँ मै, इन [...]

दिल-दुनिया

एक कोने में माँ के हाथ की बुरकियाँ, तो कहीं हँस रही बाबा की [...]

क्या महसूस कर पाते हो तुम?

क्या महसूस कर पाते हो तुम? मेरे सीने मे छिपे हर दर्द को? क्या [...]

खुशियाँ

याद है मुझे, साल पहले, मेरा हाथ थामे कहा था तुमने, मुझे खुश [...]

गर मुझे किसी भी वक्त पता चल जाये…

गर मुझे किसी भी वक्त पता चल जाये उस आख़िरी पल का, लम्हे [...]

सिलसिला

ख़ामोश है, बेचैन है, हैरान और परेशां भी है, ना किसी से कोई [...]

चोट

कल फिर एक चोट खाई है मैने, एक और घाव चीसे मार रहा है, रिस रहा है [...]

बिना तेरे हाथों को थामे…

कोशिश तो थी तेरे संग चलने की, चल पङी हूँ मैं अब बिना तेरे [...]

दूर…

मीलों दूर हैं हम ना जाने कहाँ हो तुम! दिल लेकिन मेरा पास [...]

शीशे के मर्तबानों के पीछे से…

कई यादें झाँकती हैं इन शीशे के मर्तबानों के पीछे से, कुछ [...]

वक्त का आईना

काश मै इस वक्त को कैद कर पाती, हमेशा-हमेशा के लिए! किसी कैमरे [...]

वादा

अंधेरे जब कभी तुमको डराने लगे, पथरीली राहों पर कदम डगमगाने [...]

बूँदें

कुछ नटखट सी, चुलबुली सी, धरती के सीने पर थिरकती बारिश की [...]

तुम्हारे संग

"तो क्या चलोगी तुम मेरे संग"? तुमने पूछा मुझसे, कुछ इतने करीब [...]

मेरे होंठों का लरजना तुम सुन लो. ..

मेरे होंठों का लरजना तुम सुन लो, इस बेताब दिल का धड़कना तुम [...]

शोख़ियों में घुली शबनम…

शोख़ियों में घुली शबनम, थोड़ी मासूम, थोड़ी नर्म, कभी [...]

नींद

आँखें मेरी खुली हुई, पलकों की झालर के पीछे से एकटक झाँकती [...]

मेरे होंठों का लरजना तुम सुन लो

मेरे होंठों का लरजना तुम सुन लो, इस बेताब दिल का धड़कना तुम [...]

सुरमई सी शाम

नीलम सा आसमां, पुखराजी चंदा, हीरे से चमकते सितारे, मोती से [...]

एक नन्ही सी चींटी हूँ मै..

सतर्क हूँ, सावधान हूँ मै, चौकन्नी और फुर्तीली, छोटी हूँ, पर [...]