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Author: लक्की सिंह चौहान

लक्की सिंह चौहान
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लक्की सिंह चौहान, राजस्थान के भीलवाडा जिले मे बनेड़ा ग्राम का निवासी।13 वर्ष की उम्र से ही साहित्य मे दिलचस्पी। मुझे करूण रस मे साहित्य लिखना बहुत पसंद है।मेरे साहित्य के अधिकतर विषय मेरे स्वयं के जीवन मे बिति घटनाओ पर आधारित है।मुझे अपने दोस्तो के साथ बिताएँ सुनहरे पल को कागज पर उतारना बहुत पसंद है।मेरे द्वारा रचित रचनाओ मे अधिकतर ग्रामीण परिवेश दिखाई देता है।संस्कृति व परंपरा की एक अनुठी मिसाल प्रत्येक रचना मे बसी रहती है।मेरे रचनाएँ आँसूओ की उस बूंद की छाप है, जो प्रेम के कारण नैनो से बरसती है।प्रेम तथा भाईचारे का संदेश रचना मे रचित रहता है।दोस्तो पर लिखि रचना बचपन को फिर से जीवित कर जाती है।अधिकतर रचना बचपन को इंगित कर लिखि गई है। मेरी रचना की भाषा खड़ी हिंदी बोली है।रचना के मध्य विभिन्न भाषाओ के शब्दो का भी प्रयोग किया गया है, ताकी रचना पठन योग्य बन सके। मेरी रचना मे कुछ काल्पनिक दृष्य भी दर्शाएं गए है,ताकी रचना मे दोस्ती का प्रेम उज्जवल दिखे। अब मेरी रचना से किसी को भी ठेस ना पहुचे।मेरी रचना मेरी बचपन की यादो को संजोने के लिऐ रची जा रही है। आपका अपना लक्की सिंह चौहान

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

अभी घटित नई दास्तां

बिना दोस्त के आया था, दोस्त के बिना ही गया। भीलवाड़ा से मायूस [...]

एक दोस्त जो कभी मेरे दिल के करीब था

दो दोस्तो की कहानी ये कैसी, प्रेम भाव से गढ़त ये ऐसी। प्रेम [...]

बचपन के यार जो रूठ गए तो……..!

बचपन को फिर से दौहराने कौन आयेगा, भूल गए गंर उन लम्हो को तो [...]

बेटियां

पिता के जीवन का स्वाभिमान होती है, बेटियां, सब घर वालो की जान [...]

यारो की याद

ज़हाँ का सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता है दोस्ती जहाँ मे सबसे ज्यादा [...]

दर्द की दास्तां

इतनी शिद्दतो से मै तुझको मनाता हुँ| तेरी ख़ातिर ख़ुद से लड़ [...]

विक्की तेरे इंतजार मे

कभी फिकर नही की दोस्ती कि, फिर भी आस लगाये बैठे हे। हम अपने [...]

विक्की भय्या का खुलूस

जब विक्की था, दोस्ती एक सपना थी, जब दोस्ती हुई, विक्की एक [...]

विक्की, न जाने क्या करना चाहता है

न तो वो मुझसे बोलना चाहता है, नही कुछ कहना चाहता है। दूरियो [...]

मै, मेरी दोस्त और विक्की कि यादे

हर दोस्त से पहले, हर दोस्त के बाद, मै, मेरी दोस्ती और विक्की कि [...]

बचपन रा साथी न्यारा है करना

म्हारा दोस्त, बालपणा रा है मित्र, बचपन रा साथी छोडना। म्हारा [...]

कलकता के भाईजान

क्या था जो सेवा के दौहरान हुआ, क्या था जो कविता मे गान [...]