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Author: लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
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मध्यप्रदेश में सहायक संचालक के पद पर कार्यरत...आई आई टी रुड़की से पी एच डी की उपाधि प्राप्त...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तुम मुझसे क्यूँ रूठी हो

हर साल तो इस समय तक तुम आ ही जाती थी, पता नहीं इस साल क्या हो गया [...]

काश मुझमें भी होता हुनर लाखों कमाने का

काश मुझमें भी होता बिना खून-पसीना बहाये एकड़ भर ज़मीन [...]

गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है

गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है गले काँटों से मिल [...]

खेती का खेल

खेती का भी खेल अजब है, जीत के भी हम हारे हैं अन्नदाता कहलाते [...]

सीमा पे तुम कब से गए हो…..सैनिक घर भी आ जाओ

दिन, महीनें, बरस हैं बीते, कुछ तो आस बँधा जाओ सीमा पे तुम कब से [...]

मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे- कुछ शेर

ऐसी लगी है आग सियासत की आजकल मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे [...]

बचपन तेरा जीवन सार सिखाता है

बचपन तेरा बच्चा बनकर, मुझको बहुत भगाता है जो तुतलाकर बोले [...]

तेरे आने की खबर

यूँ लगा दी दस्तक किसी ने दरवाजे पर खोला दर तो दिखा आसमां पे [...]

बाधायें भी हार मान ले, आगे बढ़ते जाना है

मुश्किल कितनी भी आ जाये, तुमको ना घबराना है बाधायें भी हार [...]

मेरा पहला रक्तदान (संस्मरण)

दिसंबर २००८ की बात है…… उत्तर भारत की ठण्ड को तो आप सभी जानते [...]

आइये पर्यावरण के लिए इस बार कुछ नया करें

लीजिये हर साल की तरह एक और पर्यावरण दिवस चला गया…… हर साल की [...]

चाय की प्याली कहे कुछ भेज दो अब चिट्ठियाँ

बून्द इक बारिश की देखो आज जो उतरी यहाँ ख्वाहिशें दिल में उठी [...]

नेताजी का पर्यावरण दिवस

आज पर्यावरण दिवस है………… ये पर्यावरण दिवस क्या होता है [...]

हर ख़ुशी सबको मिले ऐसी जमीं रब चाहिए

ख्वाहिशें ऐसी कहाँ थी आसमां अब चाहिए लोग हो बेचैन ऐसी [...]

क्या फल और सब्जियाँ भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं?

आज अख़बार के पन्ने पलटते-पलटते एक खबर पर ज्यों ही नजर पड़ी, तो [...]

तेरे बिन

तेरे बिन ___________ मै यहाँ हूँ दिल वहाँ है बिखरा बिखरा सा अपना [...]

सपना नहीं टूटा है मेरा

सपना नहीं टूटा है मेरा और ना ही टूटी हूँ मैं बस एक धुंध में [...]

लो फिर आ गया आत्महत्याओं का मौसम

अभी दसवीं तथा बारहवीं का परीक्षा परिणाम आये एक दिन भी नहीं [...]

हाय ये फेसबुकिया ज्योतिषी

आजकल फेसबुक पर कई लोगों को बड़ा अजीब सा शौक चर्राया है जिसे [...]

हाँ तुम! बस तुम!

झरनों के संगीत में हो तुम नदियों के हर गीत में हो तुम सूरज की [...]

रोज़ शाम होते ही

रोज शाम होते ही समेटने लगती हूँ मैं दिन भर के अपने आप को अपने [...]

पापा! जीवन जी कर दिखाते हैं

पापा नहीं सिखाते कैसे जीना है जिंदगी वो तो जीवन जी कर दिखाते [...]

पापा! मेरे लिए महान तुम्हीं हो!

पुण्यतिथि पर पापा की याद में *********************** थाम के मेरी नन्ही [...]

करें क्यूँ कोख ख़ाली है

जहाँ की रीत भी देखो, भला कैसी निराली है हैं नौ दिन पूजते देवी, [...]

हर सफर में मुस्कुराना चाहिए

फ़ासलें दिल के मिटाना चाहिए फूल होठों पर खिलाना चाहिए हर दुआ [...]

ज़िन्दगी के बदलते रंग

दिनों दिन मेरे जज्बात बर्फ की तरह होते जा रहे हैं झक [...]

मनाओ मिलकर होली

टेसू, सेमल खिल उठे, बजे बसन्ती राग मस्ती, रंग, गुलाल से, देखो [...]

इस होली रंग लो मुझे, साजन अपने रंग

खुशियाँ लेकर आ गया, होली का त्यौहार गाल रंगे गुलाल से, रंगों [...]

देख फिर आई होली

पीली सरसों ने किया, स्वर्ण कनक मनुहार नीली अलसी मिल हुआ, अजब [...]