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Author: Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta
Posts 43
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मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दीपावली की शुभकामनायें

आये लक्ष्मी लाये उजाला पर उपकार कराये । हर बुराई पैसे से आती [...]

हर क्षण नारायण नारायण नारायण गाएँ

माँ के गर्भ कैद से जीवा मुक्त करो हे राम पुकारे | जग में आकर [...]

आल इज वैल

भले भले ही बुरी लगे इतनी बात सही है जो दुखी है या सुखी है ढोता [...]

उसे पसंद करने वाला कोई नहीं हैं

मेरी बेटी कविता चालीस की हो रही है उसे छै सौ से अधिक लोग देख [...]

हँसी और मुस्कान की बस्तियाँ

बहुत दूर गुमगयीं बस्तियाँ हँसी और मुस्कानों की । जीवन की दो [...]

मांं सरस्वती

यमुना प्रेम, भक्ति की गंगा सरस्वती श्रद्धा की धारा प्रेम, [...]

लाल बहादुर शास्त्री जी का स्मरण

लाल बहादुर जैसा कर्मठ, भारत माँ का प्यारा पाकिस्तान पराजित [...]

रावण की ओर से शुभ कामनाएँ दशहरे की

हँसकर रावण बोल रहा है आज यदि होते श्री राम कितने रावण मार [...]

कहाँ छुपे तुम तात विभीषण ।

छाती सहती नित पद प्रहार हो रही सहिष्णुता तार तार हम भाई समझ [...]

अंगूठा दिखाना गजब हो गया

उनका अंगुठा बताना गजब हो गया तमाम हमउम्र लड़कियों और उनकी [...]

तुम्हारे बिना

तुम्हारे बिना मन नहीं लगता तुम्हारे साथ रहना मुझे आनंद [...]

जहाँ न पहुँचे रवि वहां पहुँचे कवि

ऊर्जा के स्रोत रवि तुम, युगधर्म पालक अहर्निश सिखाते जीना [...]

मैंने गज़ल लिखी (2)

नहीं दिखी धूप तो उदास हो गए दो दिनों से रुकी हुई प्यास हो गए [...]

कहकर हर हर गंग

अपनी अपनी विवेचना को कह कर वे सत्संग । तम सागर में हमें [...]

तास के पत्ते

धरती ढीली हो, माटी गीली हो सांस लेने निकल आते, जमीन मे [...]

एक स्वप्न

एक तरइया पापी देखे दो दिखें चण्डाल को । तीन तरइयाँ राजा [...]

विडम्बना

ममता मरी समता मरी अतृप्ति जीवित । मानवी संवेदनाएँ चुक [...]

गर्मी

सूरज की शहजादी गर्मी, सर्दी निकली घर से निकली मन में जन [...]

देश भक्ति की विजय गुँजाना

किसके नाम लिखूँ मैं पाती तूँ ही बता पवन वासन्ती मन मन जहर [...]

कुछ दोहे

कविता किरकी कांच जस, हर किरके को मोह । छपने की लोकेषणा, करे [...]

लगे सभी कुर्सी कब्जाने

यहाँ चली है बहस गधों पर कब्रिस्तानों, श्मशानों पर साइकिल- [...]

राजनैतिक विष

कैसे कैसे पागल नेता, कुछ भी कहते रहते हैं । और हम, पिछलग्गू [...]

घी उधार का पीने वाले

कहने की बातें कुछ और करने की बातें कुछ और आजादी के बाद देश में [...]

मेरा अभिषाप

गीत चल दिये जाओ.... मैं रोक नहीं सकता तुमको पर ध्यान रखो तुम [...]

उम्र बहुत थोडी पाते हैं

यदा कदा ही तो आते हैं भारत के रख वाले उम्र बहुत थोड़ी पाते हैं, [...]

प्रभु के चरण

माना है जब से सुख को सपन दुःख में भी खुश हैं तब से अपन सामर्थ [...]

भ्रम

मानव मन ने निराकार के, जो जो रूप गढ़े पीढ़ी दर पीढ़ी ने [...]

……की तरह

भाड़े की भीड़ जाडे‌ की धूप अधिक साथ नहीं देती खुशियों की [...]

फिर वसन्त आया …

सूरज की किरणों ने पोर पोर चूमा अलसाया सूर्य-कमल मस्ती में [...]

मेरी बेटी

बेटों से ज्यादा मां बाप को प्यार करे मेरी बेटी । दो घरों का [...]